10 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Saving Habits: गुल्लक से लेकर बैंक खाते तक, जानें बच्चों को फाइनेंशियली स्मार्ट बनाने के 4 आसान तरीके

money saving tips for children: ब्रिटेन के सर्वे में सामने आया कि दस में से सात माता-पिता बच्चों के वित्तीय भविष्य को लेकर चिंतित हैं। एक्सपर्ट्स ने गुल्लक, बैंक खाता, धीरे-धीरे बचत और चक्रवृद्धि ब्याज के जरिए बच्चों को पैसों की समझ देने के चार तरीके सुझाए हैं।

3 min read
Google source verification

Pocket Money For Children: बच्चों की परवरिश में हेल्थ और पढ़ाई के साथ-साथ एक और जरूरी पहलू है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है और वह है पैसों की समझ। बच्चे जब छोटे होते हैं तभी से उन्हें पैसों की समझ देना जरूरी है। यह बात अब सिर्फ माता-पिता की सोच नहीं, बल्कि रिसर्च और सर्वे भी कहते हैं। ब्रिटेन के स्टैंडर्ड लाइफ बैंक के एक सर्वे में सामने आया है कि दस में से सात माता-पिता अपने बच्चों के फाइनेंशियल फ्यूचर को लेकर चिंतित हैं। इस चिंता का हल फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स ने आसान तरीकों में बताया है।

अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी के बिहेवियर इकोनॉमिक्स एक्सपर्ट और लेखक डैन एरीली कहते हैं कि पैसों की कोई सीमा नहीं होती इसलिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि भविष्य के लिए कितना पैसा पर्याप्त है। लेकिन अध्ययन यह भी बताते हैं कि बचपन में ही पैसों का सही इस्तेमाल सिखाने से बच्चे के पूरे जीवन पर पॉजिटीव असर पड़ता है, और वे इसकी अहमियत समझकर पैसा का सही इस्तेमाल करते हैं।

गुल्लक से शुरू होती है पैसे की पहली पाठशाला

बच्चों में पैसों की समझ सिखाने के लिए सबसे सरल चीज होती है गुल्लक। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि जब बच्चे के हाथ में गुल्लक होती है, तो उसे यह समझ आने लगता है कि पैसा कोई खिलौना नहीं है, इसे सेफ रखना होता है। इसके अलावा अलग-अलग सिक्कों से बच्चे यह सीखते हैं कि पांच रुपये की कीमत दो रुपये के सिक्के से ज्यादा होती है। साथ ही एक्सपर्ट्स यह भी सुझाव देते हैं कि बच्चों को पॉकेट मनी देना एक अच्छी शुरुआत है यह उनको ठीक ऐसे लगेगा जैसे यह उनकी कोई कमाई है और वे पैसे बचाना सिखेंगे।

बच्चों के लिए हो बैंक अकाउंट

जैसे-जैसे बच्चा थोड़ा बडा होता है, उसके लिए बैंक खाता खुलवाना अगला जरूरी कदम है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बैंक दो तरह के खाते देते हैं। एक वे जिनमें कभी भी पैसा जमा और निकाला जा सकता है और दूसरे वे जिनमें तय अवधि के लिए पैसा जमा करना होता है जिसे आम बोलचाल में एफडी कहा जाता है। लंबी अवधि वाले खातों में ब्याज ज्यादा मिलता है। माता-पिता बच्चे के नाम से ऐसा खाता भी खुलवा सकते हैं जिसमें से बच्चा 18 साल की उम्र के बाद ही पैसा निकाल सकेगा।

चक्रवृद्धि ब्याज का जादू

चक्रवृद्धि ब्याज कई लोगों को समझ नहीं आता लेकिन बच्चों के लिए यह समझना सबसे ज्यादा जरूरी है। क्योंकि यही वह जादू है जो बच्चों की शुरुआती बचत को कई गुना बढ़ाकर देगा। सबसे पहले मान लीजिए आपने बच्चे के खाते में 10 हजार रुपये जमा किए और बैंक सालाना 5 फीसदी ब्याज देता है। तो यह रकम साल दर साल इस तरह बढती जाएगी।

पहले साल में 10,000 रुपये बढकर 10,500 रुपये हो जाएंगे। दूसरे साल में 10,500 पर ब्याज मिलेगा जो बढ़कर 11,025 रुपये हो जाएंगे। इसी तरह तीसरे साल में 11,025 पर मिलने वाले ब्याज से 11,575 रुपये हो जाएंगे। इस तरह हर साल ब्याज और मूलधन को मिलाकर ब्याज मिलता रहेगा। इस तरह जब बच्चा 18 साल का होगी तो यह रकम कई गुना बढ़ जाएगी।

बच्चों को पैसों के सिस्टम में शामिल करें

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बच्चों को पैसों के इस पूरे सिस्टम में शामिल करें ताकि वे समझ सकें कि पैसा कहां से आता है और कहां जाता है। एक्सपर्ट्स एक जरूरी बात यह भी बताते है कि परिवार की आर्थिक स्थिति किसी समय ठीक न हो और बचत न हो पाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे जरूरी यह है कि कर्ज न लें और बेवजह क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल न करें। थोड़ा-थोड़ा बचाते रहने से भी समय के साथ एक अच्छी रकम जमा हो जाती है।