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PM Kisan की 20वीं किस्त आ गई, पर कट गए 1-2 नहीं 10 लाख किसानों के नाम

पीएम मोदी ने 24 फरवरी 2025 को ने 19वीं किस्त बिहार के भागलपुर से जारी की थी। इसमें 22,000 करोड़ रुपये 9.8 करोड़ किसानों को मिले थे। इनमें 2.41 करोड़ महिलाएं शामिल थीं।
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भारत

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Ashish Deep

Aug 01, 2025

PM Kisan Samman Nidhi Yojana

कल आएगी PM किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त (सांकेतिक इमेज- पत्रिका)

PM Kisan 20th installment : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 अगस्त को PM Kisan योजना की 20वीं किस्त वाराणसी से जारी करेंगे। इसके लिए कृषि मंत्रालय ने तैयारियां तेज कर दी हैं। लेकिन इस बार करीब 10 लाख किसानों के नाम सूची से हटाए गए हैं, यानी उन्हें इस बार की किस्त नहीं मिलेगी। इसकी वजह ई-केवाईसी, जमीन सत्यापन और बैंक खाते की लिंकिंग में कमी बताया जा रहा है। पीएम मोदी ने 24 फरवरी 2025 को ने 19वीं किस्त बिहार के भागलपुर से जारी की थी। इसमें 22,000 करोड़ रुपये 9.8 करोड़ किसानों को मिले थे। इनमें 2.41 करोड़ महिलाएं शामिल थीं।

20,500 करोड़ पहुंचेंगे 9.7 करोड़ किसानों के खातों में

2 अगस्त को होने वाले इस कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में ICAR, कृषि विश्वविद्यालयों और देशभर के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के निदेशकों, कुलपतियों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कृषि मंत्री चौहान ने बताया कि इस बार 20,500 करोड़ रुपये 9.7 करोड़ पात्र किसानों के खातों में सीधे ट्रांसफर किए जाएंगे। पिछली बार 9.8 करोड़ किसानों के खाते में किस्त गई थी। इस योजना के तहत अब तक 3.69 लाख करोड़ रुपये 19 किस्तों में किसानों को मिले हैं।

क्यों कटे 10 लाख किसानों के नाम?

करीब 10 लाख किसानों को इस बार की किस्त नहीं मिलेगी। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:

1; ई-केवाईसी पूरा नहीं होना
2; जमीन रिकॉर्ड का सत्यापन न होना
3; गलत या निष्क्रिय बैंक खाता
4; डुप्लिकेट या अपात्रता की स्थिति

सरकार ने इन किसानों से अपील की है कि वे अपने कागज अपडेट कर लें ताकि अगली किस्त समय पर मिल सके।

‘त्योहार और मिशन’ के रूप में मनाया जाएगा कार्यक्रम

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह कार्यक्रम मिशन और उत्सव की तरह आयोजित किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर तक किसानों को जोड़ा जाए और ड्रोन दीदी, कृषि सखी, बैंक सखी, बीमा सखी, पशु सखी जैसे ग्रासरूट वर्कर्स की मदद से प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मौके पर खरीफ फसलों पर किसानों से बातचीत की जाए ताकि उनकी समस्याएं सुनी जा सकें और उन्हें नई तकनीकों के बारे में बताया जा सके।