
सेकेंड हैंड कार मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। (PC: Gemini)
बीते कुछ वर्षों में सेकेंड हैंड कारों की बिक्री ने अपना गियर शिफ्ट किया है। कुछ समय पहले तक सेकेंड हैंड कार खरीदने को लेकर ग्राहकों के मन में जो शंकाएं और डर था, वो अब खत्म हो चुका है, क्योंकि लंबे समय से असंगठित रहा ये बाजार अब लोगों का भरोसा जीत रहा है। लोगों की हिचक खत्म हो गई है, क्योंकि कारों को खरीदना अब ज्यादा सुविधाजनक और आसान हो चुका है। खरीदार अब नई कारों की बजाय पुरानी कारों को तरजीह दे रहे हैं। इसके पीछे किफायत, डिजिटल सुविधा और संगठित प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ता विश्वास है। आंकड़े खुद इस कहानी को बयां करते हैं।
2024 में भारत का सेकेंड-हैंड कार बाजार 36 से 45 बिलियन डॉलर का था, जो कि 2030 तक 73 से 101 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। इसमें हर साल 10 से 15% की ग्रोथ हो रही है। कई कैटेगरी में यह नई कारों की बिक्री को भी पीछे छोड़ रहा है। जिससे ये लगता है कि कार खरीदने के तरीके में एक मूलभूत बदलाव आ रहा है।
सेकेंड-हैंड कार बाजार में युवा खरीदार तेजी से बढ़ रहे हैं। Cars24 की रिपोर्ट बताती है कि 80% खरीदार 25 से 45 साल के बीच हैं और 60% पहली बार कार खरीद रहे हैं। फाइनेंसिंग बहुत बड़ा सहारा बनकर उभरा है। 2010 में सिर्फ 15% खरीदार लोन लेते थे, जो 2024 में बढ़कर 23% हो गया है।
पहले सेकेंड-हैंड कार खरीदने का मतलब था, कीमत का अंदाजा नहीं लगना। गाड़ी के इतिहास का अता-पता नहीं होगा, यानी उसके कितने मालिक रह चुके हैं, कहीं एक्सीडेंटल केस तो नहीं वगैरह-वगैरह। अब सेकेंड हैंड कार प्लेटफॉर्म्स ने इस काम को काफी आसान कर दिया है। आज करीब 30% सेकेंड-हैंड कार सौदे ऑनलाइन हो रहे हैं, जो कुछ साल पहले सिर्फ 10% थे। सेकेंड हैंड कार प्लेटफॉर्म्स की ओनरशिप प्रोटेक्शन सुविधाओं से ग्राहकों का भरोसा बढ़ता है।
Cars24 के 2025 डेटा के मुताबिक, मारुति सुजुकी 34% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है। उसके बाद हुंडई 21% और होंडा 7.8% पर है। टाटा 7.1% तक पहुंच गया है, जो ब्रांड के नए प्रोडक्ट्स और बढ़ते आकर्षण को दिखाता है। Kia भी 1.3% के साथ मजबूत शुरुआत कर चुका है। यह दिखाता है कि खरीदार नए और लेटेस्ट प्रोडक्ट पोर्टफोलियो वाले ब्रांड्स की ओर जा रहे हैं।
हैचबैक अब भी 53% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे हैं, लेकिन SUV 23% के साथ सबसे तेज बढ़ने वाली कैटेगरी है। जिसकी 2025 से 2030 तक 16% CAGR रहने की उम्मीद है। सेकेंड-हैंड SUV नई की तुलना में 30 से 40% कम कीमत पर मिल रही हैं, जिससे मिडिल क्लास के लिए थोड़ी प्रीमियम कारें मिलना आसान हो गया है। डेटा के मुताबिक, SUV और प्रीमियम हैचबैक सबसे ज्यादा पॉपुलर हैं। फर्स्ट ओनर वाली गाड़ियां 63% बाजार हिस्सेदारी रखती हैं, क्योंकि खरीदार मेंटेनेंस हिस्ट्री और सिंगल ओनर केयर वाली गाड़ियां पसंद करते हैं। पेट्रोल अब भी 64% हिस्सेदारी के साथ सबसे पसंदीदा ईंधन है। डीजल घटकर 32% रह गया है।
मॉडल स्तर पर देखें, तो भारतीय खरीदारों की पसंद और उनकी महत्वाकांक्षा साफ दिखती है। सबसे ज्यादा बिकने वाली सेकेंड-हैंड कारें स्विफ्ट, वैगनआर और ऑल्टो हैं, जिनकी डिमांड हमेशा से ही रही है। क्योकि ये सबसे सस्ती हैं, मेनटेनेंस बहुत कम रहता है और छोटे शहरों-कस्बों में पार्ट्स आसानी से मिल जाते हैं। जो लोग पहली बार कार ले रहे हैं या बजट कम है, उनके लिए सबसे किफायदी ऑप्शन है। इसके साथ ही SUV सेगमेंट में तेजी आ रही है। क्रेटा, विटारा ब्रेजा और XUV500 सबसे तेज बिक रही हैं। प्रीमियम हैचबैक में बलेनो और टियागो बहुत पॉपुलर हो रही हैं। बलेनो और टियागो में अच्छे लुक्स, टचस्क्रीन, सेफ्टी फीचर्स मिल जाते हैं, इसलिए ये “अंदर से प्रीमियम, बाहर से किफायती” का परफेक्ट कॉम्बिनेशन हैं।
ऐसा नहीं है कि असंगठित क्षेत्र पूरी तरह से खत्म हो गया, असंगठित लोकल डीलर अब भी 71% हिस्सेदारी रखते हैं, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म 27.5% CAGR से तेजी से बढ़ रहे हैं। यह दिखाता है कि डिजिटल इंडस्ट्री और अतिरिक्त फायदों की मांग बढ़ रही है, जो लोकल डीलरशिप में कम ही मिलते हैं। इसलिए भारत का सेकेंड-हैंड कार बाजार अब पहले जैसा बिखरा-बिखरा और अविश्वास वाला बाजार नहीं रह गया है। अब यह एक ऑर्गेनाइज्ड और पारदर्शी बाजार बन चुका है। इसकी दो खास वजहें मानी जा सकती हैं:
इसके अलावा लोगों की आमदनी बढ़ रही है, युवा 2-व्हीलर से कार की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, तो पहली पसंद के तौर पर सेकेंड हैंड कार उभरकर सामने आ रही है।
Published on:
21 Nov 2025 12:31 pm
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