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कभी घर में चाय के कप तक नहीं थे, आज अरबों के मालिक, Anil Agarwal ने शेयर किए दिलचस्प किस्से

Vedanta founder journey: अनिल अग्रवाल ऐसे पहले भारतीय हैं, जिनकी कंपनी लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई थी। उनका कारोबार कई देशों में फैला हुआ है। वह अपनी सादगी के लिए पहचाने जाते हैं।

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भारत

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Newsdesk

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Neeraj Nayyar

Jan 21, 2026

Vedanta Group chairman Anil Agarwal

एक पॉडकास्ट में अनिल अग्रवाल ने अपने बचपन के किस्से सुनाए हैं। (PC: instagram )

Anil Agarwal childhood struggle: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल उन कारोबारियों में शामिल हैं, जिन्होंने शून्य से शिखर का सफर तय किया है। एक जमाना था जब अनिल अग्रवाल के पास दोस्तों को चाय पिलाने के लिए कप तक नहीं थे। सोफा उनके लिए एक लग्जरी आइटम था, जिसे घर लाने के लिए उन्हें पिता से लाखों बार मिन्नतें करनी पड़ी थीं। आज वह अरबपति हैं और कारोबारी दुनिया में उनका एक अलग स्थान है। सफलता की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भी अग्रवाल ने अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा है। उनकी सादगी सभी को प्रभावित करती है।

250 रुपए में खरीदा था सोफा

एक पॉडकास्ट में अरबपति अनिल अग्रवाल ने अपने बचपन के दिनों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बचपन में उनकी केवल दो ही चाहतें थीं - घर में सोफा और दोस्तों को चाय पर बुलाना। उन्होंने कहा - मेरे घर में सोफा नहीं था। करीब 10 साल तक मैंने सोफा खरीदने का सपना देखा। फिर पिताजी को किसी तरह समझाकर 250 रुपए में सोफा लेकर आया। वो पूरे परिवार के लिए खुशी का दिन था। मेरे लिए तो यह एक बड़ी चाहत पूरी होने जैसा था। मैं शुरू से ही चाहता था कि घर में एक सोफा हो, मैं दोस्तों को चाय पर आमंत्रित करूं और हम सभी उस पर बैठकर चाय की चुस्की लें।

चाय के लिए नहीं थे कप

घर में सोफा आने के बाद अनिल अग्रवाल ने अपनी मां से कहा कि वह दोस्तों को चाय पर बुलाना चाहते हैं। इस पर मां ने कहा कि चाय तो मैं बना दूंगी, लेकिन एक जैसे कप-प्लेट नहीं हैं। यानी कप कोई और प्लेट कोई और। आमतौर पर मेहमानों को एक जैसे कप-प्लेट में ही चाय दी जाती है। अनिल अग्रवाल ने आगे बताया - 'मैंने मां से कहा कि कोई बात नहीं आप बस चाय बना दो, मैं दोस्तों को बुला रहा हूं'। जब दोस्त आए और सोफे पर बैठकर चाय पी, तो अनिल अग्रवाल की दूसरी चाहत भी पूरी हो गई। इस तरह वह छोटी-छोटी चाहतें बनाते गए और उन्हें पूरा करते गए। आज वह किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उनके पास इतना पैसा है कि जो चाहें आराम से खरीद सकते हैं।

पटना छोड़कर मुंबई में बसे

अनिल अग्रवाल ने पॉडकास्ट में बताया कि वह किसी न किसी कारण से दोस्तों को घर बुलाते थे, ताकि वह उन्हें अपना सोफा दिखा सकें। जब दोस्त सोफे की तारीफ करते तो उन्हें बहुत खुशी मिलती थी। अनिल अग्रवाल मूल रूप से बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले हैं। वह 70 के दशक में मुंबई आए और यहां स्क्रैप डीलर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। मुंबई में उनके सपनों ने उड़ान भरना शुरू किया। 1976 में बैंक लोन लेकर उन्होंने Shamsher Sterling Corporation नाम की एक केबल कंपनी खरीदी और वेदांता रिसोर्सेज की नींव रखी। 1986 में उन्होंने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज (Sterlite Industries) की स्थापना की। बाद में उन्होंने भारत एल्युमिनियम कंपनी (BALCO) और सरकारी हिंदुस्तान जिंक (HZL) में हिस्सेदारी खरीदकर माइनिंग के क्षेत्र में कदम रखा।

लंदन में लिस्ट हुई थी कंपनी

वेदांता के चीफ अनिल अग्रवाल को पहले ऐसे भारतीय होने का गौरव प्राप्त है, जिनकी कंपनी लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई। 2003 में वेदांता लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई, लेकिन बाद में अक्टूबर 2019 में उन्होंने इसे डीलिस्ट करा दिया और वापस प्राइवेट कंपनी बना दिया। अनिल अग्रवाल का कारोबार कई देशों में फैला हुआ है। वह पेट्रोलियम सेक्टर सेक्टर में भी मौजूद हैं। 2022 में उन्होंने सेमीकंडक्टर चिप की मैन्युफैकचरिंग में कदम रखने के लिए ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन से हाथ मिलाया था। इस जॉइन्ट वेंचर के तहत गुजरात में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाया जाना था, लेकिन बाद में दोनों कंपनियों की राह जुदा हो गई और अनिल अग्रवाल का सपना पूरा नहीं हो सका।