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8वें वेतन आयोग की आस में कर्मचारियों-पेंशनरों को करना पड़ेगा लंबा इंतजार?

7वें वेतन आयोग और उससे पहले भी वेतन आयोग की सिफारिशें आने में समय लगा था।

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भारत

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Ashish Deep

Sep 29, 2025

MP's Gross State Domestic Product reaches approximately 17 lakh crore

17 लाख करोड़ पर पहुंचा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (Photo-IANS)

8वें वेतन आयोग के लिए 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के सब्र का बांध टूट रहा है। क्योंकि मोदी सरकार ने जनवरी 2025 की शुरुआत में 8वें वेतन आयोग की घोषणा की थी। 16 जनवरी 2025 को यह ऐलान हुआ और इसे लेकर सरकारी कर्मचारियों और यूनियनों में काफी उत्साह दिखा। लेकिन अब सितंबर का महीना खत्म होने को है और अब तक आयोग का Terms of Reference (ToR), आधिकारिक अधिसूचना और सदस्यों की नियुक्ति तक नहीं हुई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का क्रियान्वयन 2028 तक टल जाएगा?

क्यों उठ रहा है 2028 वाला सवाल?

इतिहास गवाह है कि किसी भी वेतन आयोग को बनने से लेकर रिपोर्ट लागू होने तक 2 से 3 साल का वक्त लगता है। अगर यही पैटर्न दोहराया गया तो 2028 तक इंतजार लगभग तय माना जा रहा है।

6वें वेतन आयोग की टाइमलाइन

कब हुआ गठन : अक्टूबर 2006
कब रिपोर्ट सौंपी : मार्च 2008
कब सरकार ने मंजूरी दी : अगस्त 2008
कब हुआ लागू : 1 जनवरी 2006 से रेट्रोस्पेक्टिव
कुल कितना समय लगा : लगभग 22–24 महीने

7वें वेतन आयोग की टाइमलाइन

कब हुआ गठन : फरवरी 2014
कब ToR हुआ फाइनल : मार्च 2014
कब रिपोर्ट सौंपी : नवंबर 2015
कब मंजूरी और क्रियान्वयन हुआ : जून 2016, प्रभावी 1 जनवरी 2016 से
कुल समय लगा : करीब 33 महीने (2 साल 9 महीने)

इस तुलना में साफ दिख रहा है कि दोनों आयोगों को औसतन 2 से 3 साल का वक्त प्रोसेस को निपटाने में लगा।

क्या है 8वें वेतन आयोग की मौजूदा स्थिति

महंगाई की गणना करने वाले एजी ऑफिस ब्रदरहुड प्रयागराज के पूर्व अध्यक्ष हरिशंकर तिवारी बताते हैं कि अब तक न तो ToR जारी हुआ है और न ही सदस्यों की सूची सामने आई है। यानी प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई है। अगर आने वाले महीनों में आयोग का गठन होता है और रिपोर्ट तैयार करने में 2 साल का वक्त लगता है, तो वह 2027 तक बन पाएगी। इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट को इसकी की समीक्षा, संशोधन और मंजूरी में अतिरिक्त समय लगेगा। ऐसे में 2028 तक ही इसका क्रियान्वयन हो सकता है। हालांकि, आयोग की सिफारिशें लागू होने पर उन्हें 1 जनवरी 2026 से रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट से लागू किया जाएगा। यानी कर्मचारियों और पेंशनरों को बकाया का फायदा मिलेगा।

क्यों अहम है यह आयोग?

तिवारी बताते हैं कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग केवल वेतन बढ़ोतरी का साधन नहीं होता, बल्कि यह उनके अलाउंस, पेंशन और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर सीधा असर डालता है। आज की महंगाई और कॉस्ट ऑफ लिविंग की बढ़ती लागत के बीच वेतन आयोग का समय पर काम शुरू करना कर्मचारियों के लिए बेहद जरूरी है। पेंशनरों के लिए भी आयोग की उपयोगिता उतनी ही है। आयोग की सिफारिशों से पेंशन और महंगाई भत्ते (DA) पर सीधा असर पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होती है।

क्या है एक्सपर्ट की राय

तिवारी का मानना है कि अगर 7वें आयोग वाला पैटर्न दोहराया गया तो 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने और उसे मंजूरी मिलने में समय लगेगा। मौजूदा देरी को देखते हुए यह प्रक्रिया 2028 तक खिंच सकती है। इसके साथ ही 2029 में लोकसभा चुनाव भी ड्यू हो जाएंगे।