
2022 Maruti Baleno Coming With Head Up Display
समय के साथ देश का ऑटो सेक्टर तेजी से एडवांस होता जा रहा है। एक दौर में जो फीचर्स महंगी और लग्ज़री कारों में देखने को मिलते थें, प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अब वो फीचर्स बज़ट कारों में भी आसानी से देखने को मिल रहे हैं। ऐसा ही कुछ इस बार मारुति सुजुकी की आने वाली प्रीमियम हैचबैक कार Maruti Baleno में भी देखने को मिलेगा। कंपनी ने कुछ दिनों पहले ही अपनी इस आने वाली कार की बुकिंग शुरू की है और इसके फीचर्स से जुड़े कुछ टीजर को भी जारी किया है, जिसमें हेड-अप डिस्प्ले (Head Up Display) का भी जिक्र किया गया है। अब इस फीचर के सामने आने के बाद इसकी चर्चा जोरों से हो रही है।
ज्यादातर लोग हेड-अप डिस्प्ले (HUD) को विमानों और हाई-एंड ऑटोमोबाइल के साथ जोड़ कर देखते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं रह गया है, ये फीचर तकरीबन ज्यादातर मॉडलों में इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसमें आने वाली मारुति बलेनो भी शामिल होने जा रही है। तो आज हम अपने इस लेख में इस फीचर के बारे में बताएंगे, कि आखिर हेड-अप डिस्प्ले (एचयूडी) क्या है और ये किस तरह से एक चालक के लिए उपयोगी है।
क्या होता है हेड-अप डिस्प्ले (HUD):
हेड-अप डिस्प्ले, या जिसे HUD के रूप में भी जाना जाता है, एक तरह का पारदर्शी डिस्प्ले होता है जो उपयोगकर्ताओं को उनके सामान्य दृष्टि को दूसरी जगह किए बिना ही उसकी आंखों के सामने ही डेटा प्रस्तुत करता है। आसान भाषा में समझें तो चालक इसका फीचर का उपयोग सड़क से अपनी नज़र हटाए बिना ही आसानी से कर सकता है और वाहन संबंधी सभी डेटा उसके आखों के सामने होंगे। ये डिस्प्ले सामान्य तौर पर विंडस्क्रीन या किसी भी अन्य पारदर्शी पैनल पर प्रदर्शित किया जा सकता है।
जब हम इस फीचर के इतिहास को खंगालते हैं तो हमें मिलता है कि इसे शुरू में सैन्य विमानो के लिए विकसित किया गया था, अब वाणिज्यिक विमानों, ऑटोमोबाइल और अन्य उपकरणों में भी इसका खूब इस्तेमाल किया जा रहा है। जैसा कि हमने बताया कि, HUD तकनीक की जड़ें एविएशन सेक्टर से जुड़ी हैं, पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल ब्रिटिश रॉयल एयर फ़ोर्स (RAF) के लड़ाकू विमानों में 1940 के दशक में गनसाइट्स के साथ किया गया था।
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हेड-अप-डिस्प्ले (HUD) को मूल रूप से पायलटों की सुविधा को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया था ताकि उड़ान के दौरान उनको इंस्ट्रूमेंट पैनल को देखे बिना सभी प्रासंगिक सूचनाएं इस डिस्प्ले के माध्यम से मिलती रहें। इससे न केवल पायलट आसानी से उड़ान भर सकता था बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी ये काफी जरूरी फीचर साबित हुआ। समय के साथ तकनीक बदलती गई और इस डिस्प्ले में ज्यादा से ज्यादा जानकारियों को शामिल किया जाने लगा।
इस कार को मिला दुनिया का पहला HUD:
जबकि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में HUD तकनीक को 1980 के दशक के अंत तक इस प्रणाली को कार में शामिल नहीं किया गया था। 1988 में, ओल्डस्मोबाइल कटलैस (Oldsmobile Cutlass) कन्वर्टिबल के इंडि पेस कार एडिशन में इस तकनीक को पहली बार इस्तेमाल किया गया। इसके बाद अमेरिकी वाहन निर्माता कंपनी जनरल मोटर्स ने अपनी शेवरले कॉरवेट में इसका इस्तेमाल किया और जापानी कंपनी निसान इत्यादि ने भी इस तकनीक का प्रयोग करना शुरू किया। इस टेक्नोलॉजी ने कम समय में ही काफी सुर्खियां बटोरी लेकिन चूकिं ये तकनीक महंगी थी, इसलिए शुरूआत में ये केवल लग्जरी कारों तक ही सीमित रहा।
हेड-अप-डिस्प्ले के फायदे:
1)- विभिन्न सूचनाओं की तलाश में चालक को अपना सिर घुमाने से बचने में सहायता करता है। गति हो या नेविगेशन, आपके पास यह सब एक ही स्थान पर यानी HUD पर मिलता है।
2)- जब आप HUD से अपनी नज़रें हटाते हैं तो आँखें सड़क पर तेज़ी से फिर से ध्यान केंद्रित करने लगती हैं।
3)- आपको एक ही स्थान पर वाहन चलाते समय आवश्यक सभी जानकारी मिलती है ताकि आप अपने मोबाइल या एमआईडी में उन फैंसी डायल से सड़क से विचलित न हों।
4)- ड्राइवर की थकान को महत्वपूर्ण रूप से कम करता है क्योंकि उन्हें कार के अंदर जानकारी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता है और वे सड़क पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
इन भारतीय कारों में मिलता है ये फीचर:
हाल के दिनों में इंडियन कार कंपनियों ने भी प्रतिस्पर्धा के चलते अपने वाहनों में ज्यादा से ज्यादा फीचर्स को शामिल करना शुरू कर दिया है। अब देश में इंटरनेट और कनेक्टेड कारों का प्रचलन है। किफायती वाहन निर्माता के तौर पर मारुति सुजुकी देश की पहली कंपनी होगी जिसमें ये फीचर मिलेगा। इसके अलावा किया सेल्टॉस, टोयोटा कैमरी, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज़ बेन्ज़, लेक्सस, ऑडी, पोर्शे और रोल्स रॉयस जैसे ब्रांड्स की कारों में ये फीचर देखने को मिलता है।
Updated on:
20 Feb 2022 08:24 pm
Published on:
20 Feb 2022 08:16 pm
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