Benefits Of Diving Slowly: कार को ज़रुरत से ज़्यादा स्पीड पर चलाना हमेशा काफी रिस्की होता है। इससे एक्सीडेंट होने का रिस्क तो रहता है ही, साथ ही कार पर भी ज़्यादा प्रेशर पड़ता है। इससे कार की परफॉर्मेंस पर भी बुरा असर पड़ता है। कई लोगों का मानना है कि कार ड्राइव करने के लिए 40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड सबसे सही होती है। इसके फायदे भी होते हैं।
ओवरस्पीडिंग को कभी भी अच्छा नहीं माना जाता है। ओवरस्पीडिंग कार चलाने वाले के लिए तो काफी रिस्की होती है ही, साथ ही रोड पर और लोगों के लिए भी काफी रिस्की होती है। ज़रुरत से ज़्यादा स्पीड से कार ड्राइव करने पर एक्सीडेंट होने की रिस्क रहती है। ओवरस्पीडिंग ट्रैफिक नियमों के भी खिलाफ है। इतना ही नहीं, ओवरस्पीडिंग से कार पर भी बुरा असर पड़ता है। हर कार की एक लिमिट होती है और ओवरस्पीडिंग से कार की परफॉर्मेंस पर काफी असर पड़ता है। ऐसे में कार को स्लो यानि धीमी स्पीड में चलाना बेहतर माना जाता है। कार ड्राइविंग के लिए सही स्पीड की बात की जाएं, तो 40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड को ड्राइविंग के लिए सबसे सही माना जाता है। इसके कुछ फायदे भी होते हैं।
40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से कार ड्राइव करने के फायदे
40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से कार ड्राइव करने के फायदे भी होते हैं। आइए नज़र डालते हैं उन फायदों पर।
1. एक्सीडेंट की रिस्क होती है कम
40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से कार ड्राइव करने से एक्सीडेंट की रिस्क कम होती है। इस स्पीड से कार ड्राइव करने पर कार कंट्रोल में रहती है और कार से कंट्रोल भी नहीं छूटता। ऐसे में अपने साथ दूसरों की भी सेफ्टी रहती है।
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2. ट्रैफिक नियमों का नहीं होता उल्लंघन
40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से कार ड्राइव करने से ट्रैफिक नियमों का भी उल्लंघन नहीं होता। इससे चालान कटने की रिस्क से भी बचाव होता है।
3. फ्यूल एफिशिएंसी
40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से कार ड्राइव करने से फ्यूल एफिशिएंसी भी बनी रहती है। ओवरस्पीडिंग में फ्यूल (पेट्रोल-डीज़ल) की ज़्यादा खपत होती है। पर 40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से कार ड्राइव करने से फ्यूल की अपेक्षाकृत कम खपत होती है और फ्यूल पर खर्चा भी कम आता है।
4. कार पर नहीं पड़ता प्रेशर
ओवरस्पीडिंग करने से कार पर प्रेशर पड़ता है। 40-60 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से कार ड्राइव करने से कार पर प्रेशर नहीं पड़ता। इससे कार की परफॉर्मेंस और कंडीशन सही बनी रहती है।
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