
चार सालों में 10 हजार करोड़ का निर्यात, पड़ोसी मुल्कों की नीतियां व उच्च परिवहन लागतें आ रही आड़े
टमाटर की बढ़ती हुई कीमतों से जूझ रहे भारत के पास सब्जियों व फलों का उत्पादन व निर्यात बढ़ाकर विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ाने की प्रबल संभावनाएं हैं। 2020 से अब तक देश से दस हजार करोड़ से अधिक की सब्जियों व फलों व इनके प्रसंस्कृत उत्पादों का निर्यात हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (यूएनएफएओ) के अनुसार भारत सब्जियों में अदरक और भिंडी का सबसे बड़ा उत्पादक है और आलू, प्याज, फूलगोभी, बैंगन, पत्तागोभी आदि के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। फलों में केला, आम और पपीता उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। आम उत्पादन में तमिलनाडु अग्रणी है।
खासकर कृष्णगिरि से आम की लुगदी का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। देश की विविध जलवायु सभी प्रकार के ताजे फलों और सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित करती है। फल एवं सब्जी उत्पादन में यह विश्व में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है।
बढ़ रहा निर्यात
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार 2022-23 के 215.56 मिलियन अमरीकी डॉलर की तुलना में 2023-24 की पहली तिमाही (अप्रेल-जून) में फलों का कुल निर्यात 270.28 मिलियन अमरीकी डॉलर था जिसमें 25.38त्न की वृद्धि दर्ज की गई। इसी प्रकार ताजी सब्जियों का निर्यात 193.47 मिलियन अमरीकी डॉलर की तुलना में 204.50 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।
केले का सर्वाधिक उत्पादन
देश में सर्वाधिक केले का उत्पादन तमिलनाडु में होता है। निर्यात की दृष्टि से केला प्रमुख फल फसल है। 2022-23 में 4236.96 एमटी टन केला उत्पादन का अनुमान है।
उच्च माल ढुलाई और परिवहन लागतें बड़ी समस्या
वाणिज्य व उद्योग राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने तमिलनाडु के सांसदों जी. सेल्वम और सी. एन. अन्नादुरै को दिए जवाब में कहा कि फलों और सब्जियों जैसे संतरे और खट्टे फल, सेब, टमाटर आदि के निर्यात में मुख्य रूप से उच्च माल ढुलाई और परिवहन लागतें बड़ी समस्या है। इसके अलावा बांग्लादेश जो बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन है, द्वारा उच्च आयात शुल्क लगाने से कारोबार प्रभावित हुआ है। 2022-23 में देश के कुल निर्यात में फलों और सब्जियों का योगदान 0.74% था जिसे और बढ़ाया जा सकता है।
Published on:
10 Aug 2023 02:26 pm
