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चेन्नई हवाई अड्डे पर एक और ग्लास पैनल टूटा

बदलते मौसम के कारण टूटता है कांच

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Another glass panel broken at Chennai airport

चेन्नई हवाई अड्डे पर एक और ग्लास पैनल टूटा

चेन्नई. चेन्नई हवाई अड्डे पर 2013 में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय टर्मिनल के शुरू होने बाद से अब तक अड्डे पर स्टील और ग्लास के पैनल के कांच टूटने की 70 घटनाएं हो चुकी हैं। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से 35 घटनाओं में कांच में निकल सल्फाइड पदार्थ की मात्रा गलत होने के कारण हुई। ये पदार्थ तापमान में परिवर्तन होने से फैलता है और इससे कांच टूट जाता है।

पिछले दिनों इस तरह कांच बिखरने से पास से गुजर रहे वाहनों पर टूट कर गिरने की शिकायतें भी आई है। आकड़ों से पता चला है कि इनके टूटने में गलत तरीके से किया गया रखरखाव भी उतना ही जिम्मेदार है जितना इसकी अशुद्धि। कर्मचारियों की गलती के कारण टूटने वाले पैनलों की संख्या और अशुद्धि के कारण टूटे हुए पैनलों की संख्या लगभग बराबर ही है। इस साल अब तक नौ पैनल टूटे हैं जिनमें से पांच कर्मचारियों की लापरवाही और चार कांच में मिली हुई अशुद्धियों के कारण बिखरे हंै। साल 2015 में सबसे अधिक नुकसान हुआ था। इस साल 19 ब्रेकेज हुए जिनमें से 15 पैनल लोगों के हाथों से हुए।

टर्मिनलों के शुरू किए जाने वाले साल 2013 में होने वाली 14 घटनाएं कांच में पाई गई अशुद्धियों की वजह से हुई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब तक वर्ष 2017 में केवल छह घटनाएं दर्ज की गईं। यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं कि नए एकीकृत टर्मिनल का निर्माण होने पर ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। ब्रेकेज से बचने के लिए ग्लास को लेमिनेट करने का सुझाव भी दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि विशेषज्ञों ने पहले ही उष्णकटिबंधीय जलवायु में ग्लास के बड़े पैमाने पर उपयोग की आलोचना की थी और कहा था कि यहां के मौसम में यह डिजाइन उपयुक्त नहीं होगा।