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सिर्फ 4-5 राज्यों में बोली जाने वाली भाषा है हिंदी, देश को एकजुट नहीं करती..

- सनातन के बाद हिन्दी को लेकर बोले उदयनिधि

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सिर्फ 4-5 राज्यों में बोली जाने वाली भाषा है हिंदी, देश को एकजुट नहीं करती..

सिर्फ 4-5 राज्यों में बोली जाने वाली भाषा है हिंदी, देश को एकजुट नहीं करती..

चेन्नई.

हिंदी दिवस के मौके पर उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि जो भाषा देश के चार-पांच राज्यों में बोली जाती है उसके लिए कैसे यह कहा जा सकता है कि यह देश को एकजुट करती है। द्रमुक नेता और मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन दरअसल गृहमंत्री अमित शाह के हिंदी दिवस पर दिए गए संदेश पर आपत्ति जता रहे थे और उन्होंने अमित शाह के संदेश को गैर हिंदी भाषी लोगों पर हिंदी थोपने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि हिंदी देश के मात्र चार-पांच राज्यों में बोली जाती है, इस परिस्थिति में कैसे हिंदी देश को जोडऩे वाली भाषा बन सकती है।

दरअसल, आज यानी गुरुवार (14 सितंबर) को "हिंदी दिवस" के अवसर पर एक संदेश में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 'हिंदी' भारत में भाषाओं की विविधता को एकजुट करती है और इसने विभिन्न भारतीय और वैश्विक भाषाओं और बोलियों का सम्मान किया है। गृह मंत्री ने यह भी कहा था कि 'हिंदी' ने कभी भी किसी अन्य भारतीय भाषा से प्रतिस्पर्धा नहीं की है और न ही करेगी और एक मजबूत देश अपनी सभी भाषाओं को मजबूत करने से ही उभरेगा।

अमित शाह के इस संदेश की निंदा करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने तमिल में एक पोस्ट में लिखा जिसमें उन्होंने कहा-हिंदी देश के लोगों को एकजुट करती है और क्षेत्रीय भाषाओं को सशक्त बनाती है, केंद्रीय मंत्री अमित शाह का बयान उनके हिंदी प्रेम को दर्शाता है। उनका यह बयान उसी तरह का है जैसे हम चिल्लाकर यह कहते हैं कि यदि आप हिंदी पढ़ेंगे, तो आप प्रगति कर सकते हैं। उन्होंने लिखा तमिलनाडु में तमिल और केरल में मलयालम भाषा बोली जाती है क्या हिंदी इन दोनों राज्यों को एकजुट करती है?

उदयनिधि स्टालिन ने लिखा है कि चार-पांच राज्यों में बोली जाने वाली हिंदी भाषा पूरे देश को जोड़ती है, यह कहना अमित शाह का बेतुका बयान है। उन्हें हिंदी को छोडकऱ देश की अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का अपमान बंद करना चाहिए। उदयनिधि स्टालिन ने अपने पोस्ट के अंत में लिखा है-हिंदी थोपना बंद करें। ज्ञात हो कि द्रमुक ने अपने स्थापना काल से ही हिंदी का विरोध किया है। तमिलनाडु में हिंदी विरोधी आंदोलन हुआ था। द्रमुक ने शुरुआत से ही हिंदी भाषा का विरोध किया है और यह कहा है कि उनपर हिंदी भाषा को थोपा ना जाए। करुणानिधि ने भी हिंदी का विरोध किया था और अब उनके पोते उदयनिधि स्टालिन भी वही कर रहे हैं।