चेन्नई

हर कोने के वायु प्रदूषण की जांच करेगा वाहनों में लगने वाला उपकरण

IIT- Madras का आविष्कार : शोधकर्ताओं का दावा है कि इस कम लागत वाले मोबाइल निगरानी उपकरण से पूरे शहर उच्च रिज़ॉल्यूशन मैपिंग संभव हो सकेगी। इस उपकरण में डेटा साइंस के सिद्धांतों का उपयोग होता है जो प्राप्त डेटा के विश्लेषण में सहायक है।

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Jun 16, 2023
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आइआइटी) के शोधकर्ताओं ने कम लागत वाला मोबाइल (चल) वायु प्रदूषण निगरानी उपकरण विकसित किया है।

चेन्नई. आने वाले दिनों में भौगोलिक क्षेत्र विशेष के प्रत्येक कोने में वायु स्तर का माप आसान हो जाएगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आइआइटी) के शोधकर्ताओं ने कम लागत वाला मोबाइल (चल) वायु प्रदूषण निगरानी उपकरण विकसित किया है। यह प्रदूषण सेंसर उच्च स्थानिक और अच्छे रिज़ॉल्यूशन के साथ विस्तारित क्षेत्र की वायु गुणवत्ता की निरंतर निगरानी करने में सक्षम बताया गया है।

परंपरागत रूप से वातावरण की वायु गुणवत्ता को निगरानी स्टेशनों में मापा जाता है और इसे 'वायु गुणवत्ता सूचकांक' के रूप में व्यक्त किया जाता है। चूंकि ये स्टेशन निश्चित स्थानों पर होते हैं तथा वायु गुणवत्ता माप की इनकी एक सीमा होती है। हालांकि प्रदूषण का स्तर दिन के अलग-अलग समय पर और कुछ सौ मीटर की दूरी पर बदल जाता है। इनके माप के लिए उच्च लागत के कारण अधिक स्टेशन स्थापित करना व्यावहारिक नहीं है। ऐसे में आइओटी आधारित मोबाइल वायु प्रदूषण तकनीक कारगर हो सकती है। शोधकर्ताओं का दावा है कि इस कम लागत वाले मोबाइल निगरानी उपकरण से पूरे शहर उच्च रिज़ॉल्यूशन मैपिंग संभव हो सकेगी। इस उपकरण में डेटा साइंस के सिद्धांतों का उपयोग होता है जो प्राप्त डेटा के विश्लेषण में सहायक है।

पायलट परियोजना

शोधकर्ताओं ने इस डिवाइस की उपयोगिता की जांच करने के लिए दो मौकों पर इसका उपयोग किया। पहली बार पश्चिमी चेन्नई के 15 वर्ग किमी के दायरे में वाहनों की आवाजाही, शहरी बसावट और क्रियाओं से होने वाले प्रदूषण की जांच की गई। निष्कर्ष यह निकला कि प्रदूषण का पैमाना हर जगह परिवर्तनशील था। इसी तरह दीपावली की शुरुआत से समाप्ति के छह दिनों की अवधि में साउथ चेन्नई के चार विशेष क्षेत्रों में वायु में पीएम 2.5 का माप किया गया। इन दोनों स्टडी के निष्कर्ष शोध पत्र में प्रकाशित किए गए हैं।

आस-पास के प्रदूषण को भी जानने में मिलेगी मदद

मोबाइल वायु गुणवत्ता सेंसर व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल दोनों में व्यापक रूप से उपयाेगी होगा। निजी निगरानी उपकरण लोगों को उनके आस-पास के प्रदूषण के स्तर के बारे में जानने में मदद करेगा ताकि वे बचाव के उपाय कर सकें। अगर स्थानीय प्रदूषण स्तर ज्ञात हो तो यातायात मार्ग में बदलाव भी किया जा सकता है। यह स्मार्ट सिटी प्लानिंग में सरकार को भी आवश्यक इनपुट उपलब्ध कराएगा।

प्रोफेसर रघुनाथन रंगास्वामी, केमिकल इंजीनियरिंग विभाग, आइआइटी मद्रास

Published on:
16 Jun 2023 07:00 pm
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