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Ranipet सीट पर बड़ा बदलाव: विनोद गांधी ने छोड़ी सीट, मंत्री आर. गांधी होंगे DMK उम्मीदवार

Ranipet  विधानसभा सीट पर चुनाव से ठीक पहले बड़ा उलटफेर हुआ है। डीएमके के घोषित प्रत्याशी विनोद गांधी ने नामांकन की अंतिम तिथि पर सोशल मीडिया के जरिए घोषणा की कि वे Ranipet सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। अब इस सीट से उनके पिता और मंत्री आर. गांधी उम्मीदवार होंगे। विनोद गांधी ने क्यों छोड़ी […]

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सांकेतिक इमेज

Ranipet विधानसभा सीट पर चुनाव से ठीक पहले बड़ा उलटफेर हुआ है। डीएमके के घोषित प्रत्याशी विनोद गांधी ने नामांकन की अंतिम तिथि पर सोशल मीडिया के जरिए घोषणा की कि वे Ranipet सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे। अब इस सीट से उनके पिता और मंत्री आर. गांधी उम्मीदवार होंगे।

विनोद गांधी ने क्यों छोड़ी Ranipet सीट?

विनोद गांधी, जो डीएमके पर्यावरण प्रकोष्ठ के राज्य उपसचिव हैं, ने पार्टी अध्यक्ष एमके स्टालिन और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने अपने पिता की चुनाव लड़ने की प्रबल इच्छा को देखते हुए यह फैसला लिया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को धन्यवाद दिया और भरोसा जताया कि वे जनसेवा के लिए आगे भी प्रतिबद्ध रहेंगे। विनोद गांधी के अनुसार, यह निर्णय उन्होंने अपने पिता के सम्मान और पार्टी हित में लिया है।

परिवार में असमंजस खत्म, पार्टी में चर्चाएं तेज

विनोद गांधी का यह कदम सामने आने के बाद मंत्री आर. गांधी अब Ranipet सीट से चुनाव लड़ेंगे। इससे परिवार के भीतर उम्मीदवार को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति खत्म हो गई है। वहीं पार्टी के दो अन्य मंत्री, एम. तंगराज और कयलविझी सेल्वराज को इस चुनाव में टिकट नहीं मिला है, जिससे डीएमके के अंदर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

क्या है Ranipet सीट पर नए समीकरण?

राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को Ranipet क्षेत्र और डीएमके पार्टी दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विनोद गांधी ने साफ किया है कि वे पार्टी के प्रति समर्पित बने रहेंगे और जनहित में काम जारी रखेंगे। अब मंत्री आर. गांधी के मैदान में उतरने से Ranipet सीट पर चुनावी समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।

डीएमके के लिए क्या है आगे की राह?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद नजरें अब Ranipet सीट पर होने वाले मुकाबले पर टिकी हैं। पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक नए उम्मीदवार के साथ चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। विनोद गांधी के फैसले से पार्टी में एकजुटता और परिवार के भीतर तालमेल का संदेश गया है।