
खानों में भरा पानी हो सकता है खतरनाक
कोयम्बत्तूर. पिछले दिनों हुईबारिश से कोय बत्तूर सहित आसपास के इलाकों में स्थित खदानों में पानी भर गया है। लेकिन न तो खान विभाग ने और न ही खान मालिकों ने दुर्घटना रोकने के लिए कोई इंतजाम किए है। खानों में पानी भरने से ये अच्छे खास जलाशय में तब्दील हो गए हैं। लोगों ने प्रशासन से यहां चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग की है।क्योंकि इन खदानों में भरे हुए पानी में लोग नहाने -धोने लगे हैं, जिससे कभी भी हादसा हो सकता है।ये सैकड़ों मीटर गहरी और जानलेवा हैं।इन के चारों ओर तारों की बाड़ लगा कर भी सुरक्षित किया जा सकता है।
कोयम्बत्तूर के पास मेट्टुपालयम में ऐसी कई खदानें हैं जो बारिश के पानी से लबालब हो गई हैं। विशेष रुप से मेट्टुपालयम से करमडाई और सिरमुगाई तक ऐसा करीब बीस से अधिक खदानें हैं। इनमें से अधिकांश में खनन कार्य पूरा हो चुका है और इन्हें यूं ही छोड़ दिया गया है।
लोगों ने खनन विभाग से यहां चेतावनी बोर्ड सहित यहां तक पहुंचने के मार्ग को बंद करने की मांग की है
फिलहाल लोग यहां नहाने , मछली पकडऩे और पिकनिक का शौक पूरा कर रहे हैं। लेकिन यह खतरनाक हो सकता है। अधिकांश खदानें आबादी से दूर हैं। कोई हादसा होने पर बचाने वाला भी दूर-दूर कर नजर नहीं आता। लोगों ने खनन विभाग से यहां चेतावनी बोर्ड सहित यहां तक पहुंचने के मार्ग को बंद करने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि इसी साल गर्मियों के दौरान करीब आधा दर्जन ऐसे हादसे हुए हैं, जिनमें स्कूली बच्चों की इन खदानों में नहाते वक्त डूबने से मौत हुई थी।उल्लेखनीय है कि अप्रेल माह में वेलायुधमपातयम में तीन किशोरों की खान में भरे पानी में डूबने से मौत हो गई थी।सुदर्शन, मनोहर व समीर खान तीनों दोस्त थे व ११ वीं कक्षा में पढ़ते थे। इनकी उम्र १६ -१७ साल थी।इसी तरह अराकुलम गांव में दो किशोरों जयप्रकाश व मुवेंडर (१७) की भी खान में भरे पानी में डूबने से मौत हो गई थी। दोनों बारहवीं कक्षा के छात्र थे।

Published on:
29 Jun 2018 01:26 pm
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