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पारंदूर एयरपोर्ट बनने पर क्यों किसानों को खेत और घर खोने का डर सता रहा है?

एयरपोर्ट: ग्रामीणों को अपना अस्तित्व खोने का सता रहा डर

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पारंदूर एयरपोर्ट बनने पर क्यों किसानों को खेत और घर खोने का डर सता रहा है?

पारंदूर एयरपोर्ट बनने पर क्यों किसानों को खेत और घर खोने का डर सता रहा है?

चेन्नई.

चेन्नई के पास पारंदूर में बनने वाले नए एयरपोर्ट को लेकर आसपास के ग्रामीणों को अपना अस्तित्व खोने का डर सता रहा है। कयास ये लगाए जा रहे थे कि एयरपोर्ट के लिए जमीन के अधिग्रहण के बाद ग्रामीणों का जीवन संवर जाएगा लेकिन इसके विपरीत लोग अपना जमीन और घर खोने के डर से प्रदर्शन कर रहे है। पारंदूर के निवासी प्रस्तावति परियोजना को सरकार द्वारा लागू करने को लेकर आशंकित और असहाय महसूस कर रहे हैं। उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि इस परियोजना को कैसे लागू किया जाएगा।

खेती से जुड़ा बड़ा वर्ग
पारंदूर चेन्नई से लगभग 80 किलोमीटर और कांचीपुरम के मंदिर शहर से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर स्थित एक शांत गांव है। यहां के निवासियों का एक बड़ा वर्ग मवेशी और बकरी पालन के साथ-साथ धान की खेती में लगा हुआ है। गांव में बड़ा बुनियादी ढांचा नहीं है। इसमें सिर्फ एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय, एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और देवी को समर्पित एक छोटा व प्राचीन मंदिर है, लेकिन यह सौंदर्य की दृष्टि से काफी सुंदर है। जिसमें बहुत सारे जल निकाय और आद्र्रभूमि क्षेत्र हैं।

अजीब और अनुचित

धान की खेती करने वाले एक किसान धनशेखरन ने कहा कि हम अपनी खेती की जमीन नहीं छोड़ सकते। मैं और कोई काम नहीं जानता। सरकार को हमारी जमीनों को कंक्रीट की इमारतों के निर्माण के लिए बदलने की योजना बनाने के बजाय किसानों की मदद और बढ़ावा देना चाहिए। यह अजीब और अनुचित है। हमारी आजीविका लूटी जा रही है।

खेत बचाओं और हम एयरपोर्ट नहीं चाहते

हालांकि ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों को उनकी जमीन के लिए सरकार द्वारा बाजार मूल्य से साढ़े तीन गुना अधिक दर पर मुआवजा देने का वादा किया गया है, लेकिन वे इससे संतुष्ट नहीं हैं। एक अन्य ग्रामीण राजेन्द्रन का कहना है कि जब से एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव आया है तब यहां के निवासी इस डर से आंदोलन कर रहे हैं कि वे अपने घरों और खेती की जमीन को खो देंगे। उन्होंने खेत बचाओं और हम एयरपोर्ट नहीं चाहते का प्लाकार्ड लगाकर गांव गांव घूम रहे है।

सरकार भावनाओं को समझें

एक युवती भानुप्रिया का कहना है कि यह खेत जमीन उन्हें उनके पूर्वजों से मिले है। भले ही सरकार बाजार मूल्य से अधिक भुगतान करती है, हम अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं। सरकार हमें मजबूर करने के बजाय हमारी भावनाओं का सम्मान करें। अगर हमने खेती करना छोड़ दिया, तो हम और क्या करेंगे? हम भोजन के लिए कहां जाएंगे? रिपोट्र्स के मुताबिक, सरकार मेगा इंफ्रा प्रोजेक्ट के लिए परंदूर और उसके आसपास के 12 गांवों में करीब 5000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने की योजना बना रही है।

12 गांव के लोग विरोध में

कांचीपुरम के जिला कलक्टर डॉ एम. आरती का कहना है कि सरकार कृषि भूमि के अधिग्रहण को कम करने की कोशिश करेगी। एयरपोर्ट का अंतिम नक्शा अभी जारी नहीं किया गया है। जितना संभव हो सके कृषि भूमि अधिग्रहण को कम करेंगे। 12 गांव एकनापुरम, नेलवई, थंडलम, कट्टुपत्तूर, कोडवूर कॉलोनी, अगमपुरम, नागपट्टू, पल्लापरंदूर, मेट्टुपरंदूर, मेलेरी, वलात्तूर और महादेवी मंगलम ने नए एयरपोर्ट का विरोध का संकेत दिया है।