
Poongundran reveals his role in Jaya's house before probe panel
चेन्नई.
पूर्व मुख्यमंत्री स्व. जे. जयललिता के सचिव पूंकुंड्रन ने पोएस गार्डन आवास पर होने वाले कार्यों और घटनाओं के प्रति पूरी अनभिज्ञता जताई। उनकी मानें तो उनका कार्यक्षेत्र काफी सीमित था।
ज्ञातव्य है कि जयललिता की मृत्यु की जांच कर रहे रिटायर्ड जज आरमुगसामी के आयोग ने उनके निकटतम सहयोगियों व अधिकारियों के अलावा कई लोगों से पूछताछ की है।
इस कड़ी में डा. शंकर जो उनकी जांच टीम में थे से दो बार पूछताछ की गई। अपोलो अस्पताल की ओर से दो सूटकेस में जयललिता को दिए गए उपचार का विवरण पेश किया गया है।
जयललिता की सबसे करीबी वी. के. शशिकला की ओर उनके वकील पेश हुए। जबकि दो बार राज्य की शासन सचिव गिरिजा वैद्यनाथन आयोग के सामने पेश होकर बयान दर्ज करा चुकी ैहै।
इस कड़ी में जयललिता के सचिव पूंकुंड्रन से पूछताछ हुई। जांच आयोग ने जयललिता को अस्पताल भर्ती कराते वक्त हुए घटनाक्रम के बारे में उनसे पूछा। पूंकुंड्रन से पूछा गया कि २२ सितम्बर को जयललिता के आवास वेदा निलयम में क्या हुआ। उसके बाद उनको अपोलो अस्पताल भर्ती कराया गया था और ५ दिसम्बर को जयललिता का निधन हो गया था।
इस पर निजी सचिव ने कहा कि वेदा निलयम बंगले में वे उनको आवंटित एक कमरे तक सीमित थे। वे भीतर उसी वक्त जाते थे जब उनको बुलाया जाता था। उनका मुख्य कार्य जयललिता के नाम आने वाले पत्रों व खतों को देखना और उनको बताना होता था।
पूंकुंड्रन ने जयललिता को प्रदत्त उपचार और चिकित्सा सुविधा के बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार किया। उनका यह भी कहना था कि वे अस्पताल में जयललिता से कभी नहीं मिले।
ज्ञातव्य है कि अचेतावस्था में जयललिता को २२ सितम्बर २०१६ को अपोलो अस्पताल भर्ती कराया गया था। ७५ दिन के इलाज के बाद ५ दिसम्बर को उनकी मौत हो गई। जयललिता की मृत्यु पर संदेह को लेकर कई लोगों ने आशंका व्यक्त की। फिर सरकार ने रिटायर्ड जज आरमुगसामी की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का कमीशन ऑफ इन्क्वायरी एक्ट १९५२ के तहत गठन किया।
Published on:
25 Jan 2018 05:58 pm
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