
बारिश मुख्य कारण नहीं चुनाव टालने का
चेन्नई. तिरुपरमकुंड्रम और तिरुवारूर में उपचुनाव अभी नहीं कराए जा सकते। इसके पीछे चुनाव आयोग ने तर्क दिया है कि बारिश के मौसम के कारण यह देरी हो रही है। राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि उपचुनाव देर से कराने का कोई और ही कारण है।
कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदम्बरम के मुताबिक तमिलनाडु में अभी चुनाव नहीं होने चाहिए। हाल ही करुणानिधि के निधन के बाद श्रद्धांजलि सभा में हिस्सा लेते हुए उन्होंने यह बात कही। उनके अनुसार राज्य में अगर निष्पक्ष चुनाव कराना है तो आयोग को कुछ समय बाद ही उपचुनाव कराना चाहिए। तिरुपरमकुड्रम विधानसभा सीट पर उपचुनाव अभी होता है तो एआईएडीएमके की जीत होगी, वहीं डीएमके नेता एमके अझगिरी तिरुवारुर से चुनाव लड़े तो भारी मतों से जीत सकते हैं। डीएमके के लिए यह स्थिति सही नहीं होगी अगर अझगिरी पार्टी में शामिल नहीं हुए तो। उधर दबे मन से डीएमके भी इस देरी का समर्थन कर रही है क्योंकि आरके नगर की हार के बाद वह और कोई सीट गंवाना नहीं चाहती। एक सीट हाथ से जाना स्टालिन के नेतृत्व को चुनौती देगा। वहीं स्टालिन अपना पूरा ध्यान स्थानीय निकाय चुनावों पर टिकाए हुए हैं। बारिश के मौसम और चक्रवात को कारण बताते हुए तमिलनाडु की मुख्य सचिव गिरिजा वैद्यनाथन ने आयोग को पत्र लिखकर चुनाव बाद में कराने की मांग की है।
उपचुनाव को रोकने के लिए एआईएडीएमके, डीएमके कर रही साजिश
- टीटीवी दिनकरण ने लगाया आरोप
चेन्नई. अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम के उपमहासचिव टीटीवी दिनकरण ने सोमवार को एआईएडीएमके नीत राज्य सरकार और मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके पर तिरुपरमकुंड्रम और तिरुवारुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का सामना करने से डरने का आरोप लगाया। यहां पत्रकारों से बातचीत में दिनकरण ने कहा उपचुनाव को रोकने के लिए दोनों पार्टियां साजिश रचने में लगी हैं लेकिन इस तरह कि हरकत लोगों का लोकतंत्र से भरोसा उठा देगी। उन्होंने कहा कि अपनी हार के डर से सत्तारूढ़ पार्टी मानसून का हवाला देकर उपचुनाव को रोकने की कोशिश कर रहे है जबकि डीएमके इसको रोकने के लिए कोर्ट का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही डीएमके नेता आर.एस. भारती ने कहा था कि तिरुपरमकुंड्रम का उपचुनाव नहीं होगा। वहीं दूसरी ओर डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन विज्ञप्ति जारी कर चुनाव आयोग से उपचुनाव कराने की मांग कर रहे हैं जो कि आश्चर्य की बात है।
राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित की टिप्पणी जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलरों कि नियुक्ति में करोड़ों के लेनदेन का आरोप लगाया था पर प्रतिक्रिया करते हुए दिनकरण ने कहा पूर्व राज्यपाल सी. एच. विद्यासागर राव ने भी इस मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री एडपाडी के. पलनीस्वामी को जानकारी दी थी। उसके बाद मुख्यमंत्री ने कार्रवाई का आश्वासन भी दिया था लेकिन अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। दिनकरण ने राज्यपाल से तंजावुर के शास्त्रा विश्वविद्यालय वाले मामले में भी आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने शास्त्रा विश्वविद्यालय को ५८ एकड़ सरकारी जमीन जिस पर विश्वविद्यालय द्वारा २८ इमारत बनाई गई है, को वापस करने का निर्दश दिया था। इस मुद्दे पर कार्रवाई करने के बजाय राज्यपाल विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में अतिथि के तौर पर उपस्थित होते हैं।
Published on:
09 Oct 2018 03:07 pm
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