
Srilanka Crisis : जब एक अंडा 29 रुपए और आलू 380 रुपए हो तो जगह छोडऩी ही पड़ती है...
पी. एस. विजयराघवन
चेन्नई. गहने आभूषण बेचकर और बोरिया बिस्तर समेटे गुच्छों में श्रीलंका से तमिलों का पलायन दिन-ब-दिन बढऩे लगा है। यह राज्य की आर्थिक सेहत की दृष्टि से सही नहीं है तो सुरक्षा के नजरिए से भी आंखें बंद करने का विषय नहीं है। हालांकि मानवता के समक्ष यह सब मसले गौण हो जाते हैं इसलिए इनके आगमन को रोका नहीं जा रहा है। श्रीलंका से तमिल शरणार्थियों के पलायन का इतिहास दशकों पुराना है। लेकिन इस बार की वजह आतंक नहीं बल्कि महंगाई है जिसने लोगों को मुल्क छोडऩे पर विवश कर दिया है। तमिलनाडु के रामेश्वरम में इनके लिए शिविर स्थापित है। केंद्र सरकार से इनको बतौर वैध शरणार्थी अपनाने और बसाने के उपाय होने लगे हैं। तीन-चार मौकों को शामिल करते हुए अब तक ७५ शरणार्थी पिछले एक महीने में रामेश्वरम आए हैं।
श्रीलंका से आए शरणार्थियों का दर्द सुनने और समझने के लिए शब्दों की आवश्यकता नहीं है। उनके चेहरे और आंखें भर काफी है जो यह बता देती है कि वे कितने व्यथित और विचलित हैं। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे की सरकार को वे कोसते हैं और कहते हैं कि अंडा और दूध का पाउडर खरीदने तक उनके पास पैसे नहीं है।
81 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था
विशेषज्ञों के अनुसार 81 अरब डॉलर की श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था लगभग चरमरा चुकी है। श्रीलंका को पुराना कर्जा चुकाने के लिए विदेशी भंडार का तीन गुना खर्च करना होगा। कर्ज के जाल से लेकर महंगाई तक, कई चीजों ने मौजूदा संकट में योगदान दिया। आलू और प्याज का प्रतिकिलो २२२ व ३८० रुपए तक पहुंच जाना स्पष्ट करता है कि महंगाई हद पार कर चुकी है। सूखी मिर्च की कीमत १२०० के पार है तो एक अंडा २९ रुपए में बिक रहा है। इन कीमतों की जानकारी अप्रेल के पहले सप्ताह में सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका ने दी थी। यूक्रेन संकट ने भी पड़ोसी देश में हालात और विकट कर दिए।
विश्व बैंक की नजर
विश्व बैंक श्रीलंका में अनिश्चित आर्थिक दृष्टिकोण और लोगों पर प्रभाव के बारे में बेहद चिंतित है। हम गरीब और कमजोर परिवारों को आर्थिक संकट का सामना करने में मदद करने के लिए आपातकालीन सहायता प्रदान करने पर काम कर रहे हैं। हम श्रीलंका में सतत और समावेशी विकास के लक्ष्य को लेकर ठोस उपाय करेंगे।
फारिस हदद-ज़र्वोस, विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर श्रीलंका
तमिलनाडु में शरणार्थी और उपाय
- राज्य में ६७ शरणार्थी शिविरों में बसे हैं करीब ९० हजार शरणार्थी
- शिविरों में बसे परिवार के मुखिया को प्रतिमाह १५००, वयस्क सदस्य को १००० और बच्चों को ५०० रुपए दिए जाते हैं
- मौजूदा पलायित होकर आए तमिलों को अवैध अप्रवासी की श्रेणी में रखा गया है और केंद्र से इनको शरणार्थी का दर्जा दिए जाने के बारे में लिखा गया है
- सरकार इनको शरणार्थी का दर्जा दिलाने के लिए विधिवेताओं की राय ले रही है
- इन शिविरों का कल्याण बजट ३१७ करोड़ का है
डूबी अर्थव्यवस्था के घटक
- श्रीलंका के पास लगभग दो बिलियन अमरीकी डालर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जबकि वर्ष 2022 में कुल बकाया ऋण सात बिलियन अमरीकी डॉलर पहुंच गया
- 2018 में श्रीलंका में विदेशी भंडार दस अरब अमेरिकी डॉलर के करीब था। यह 2021 में दो बिलियन अमरीकी डालर तक कम हो गया।
- अपे्रल के पहले सप्ताह में श्रीलंकाई मुद्रा अमरीकी डॉलर की तुलना में ३१० रुपए थी। 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच श्रीलंकाई रुपये में भारतीय रुपये के मुकाबले 31.6 प्रतिशत की गिरावट आई है।
- घरेलू सामानों, विशेष रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। चावल की खुदरा कीमत एक साल पहले के स्तर से 60 प्रतिशत अधिक थी, जबकि प्याज की कीमत 79 प्रतिशत और अंडा तो कई गुना महंगा हो गया।
पूरी जांच पड़ताल के बाद प्रवेश
श्रीलंकाई तमिलों के आने का यह प्रसंग पहले की तरह नहीं है जब पड़ोसी देश में लिट्टे हावी था। इससे तमिलनाडु की कानून-व्यवस्था पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। हां, इनकी बसावट और सहायता पर होने वाले से राज्य के खजाने पर बोझ जरूर पड़ेगा। श्रीलंका से आने वाले शरणार्थियों को अनुमति देने से पहले पुलिस और राजस्व विभाग पूरी तरह व्यक्ति विशेष की कुंडली खंगालता है।
- सांगाराम जांगिड़, पूर्व पुलिस महानिदेशक
Published on:
04 May 2022 05:19 pm
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