
तमिलनाडु में 1967 के बाद पहली बार किसी सत्ताधारी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को राज्य की सभी लोकसभा सीटें जीतने में कामयाबी मिली है।गौरतलब है कि 1991, 1996 और 2004 में विपक्षी दलों ने यह सफलता हासिल की थी। अपनी इस जीत से गदगद डीएमके ने इस सफलता का श्रेय 2019 से बनाए गए मजबूत गठबंधन और पार्टी कार्यकर्ताओं के व्यापक प्रयासों को दिया।सभी 40 हमारे हैं, देश भी हमारा है नारे पर किया कामपार्टी के एक राज्य स्तरीय नेता ने कहा कि ‘पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के निर्देशानुसार हमने सितंबर 2022 से लोकसभा चुनाव के लिए काम करना शुरू कर दिया था।शुरू से ही हमारे नेता सभी 40 हमारे हैं, देश भी हमारा है (नारपदुं नमदे, नाडुं नमदे) के नारे के साथ सभी 40 सीटें हासिल करने के लिए काफी उत्सुक थे। पार्टी ने बूथ समितियों को मजबूत किया और क्षेत्रीय स्तर, जिला स्तर और निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर कई कार्यशालाओं के माध्यम से उन्हें चुनाव कार्य के लिए निर्देशित किया।
कार्यकर्ताओं ने दिलाई जीतएक अन्य नेता ने के मुताबिक बूथ समिति को मजबूत करने के अलावा पार्टी ने जमीनी हकीकत और मौजूदा सांसदों के पक्ष-विपक्ष का आकलन करने के लिए पिछले साल हर महीने सर्वेक्षण किया। रिपोर्टों के आधार पर, कुछ उमीदवारों को बदल दिया गया और गठबंधन सहयोगियों को भी सभी सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन क्षेत्र बदलने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि ‘सबसे बढ़कर, हमारा नेतृत्व हमें बूथ स्तर पर गठबंधन सहयोगियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने का निर्देश देता रहा। इसलिए गठबंधन के अंकगणित और कार्यकर्ताओं के बीच की केमिस्ट्री ने इंडिया ब्लॉक को तमिल भूमि में 100 फीसदी जीत दर्ज करने में मदद की।
विचारधारा के लिए बना इंडिया गठबंधनजिला-स्तरीय पदाधिकारियों ने भी बताया कि स्टालिन ने सत चेतावनी दी थी कि अपने बूथ पर विफल रहने वाले पदाधिकारियों इसका स्पष्टीकरण देना होगा। ऐसा कहकर उन्होंने प्रत्येक पदाधिकारी को कड़ी मेहनत करने और पार्टी में अपनी स्थिति को बचाने के लिए प्रेरित किया। सीपीआई के राज्य उप सचिव एन. पेरियासामी ने कहा कि जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राज्य में इंडिया ब्लॉक राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि विचारधारा के लिए बना है।
Published on:
06 Jun 2024 03:29 pm
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