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हिजाब विवाद: मद्रास हाईकोर्ट ने पूछा, क्या सर्वोपरि है-राष्ट्र या धर्म

पीठ ने कहा कि यह सचमुच में स्तब्ध करने वाला है, कोई व्यक्ति हिजाब के पक्ष में है, कुछ अन्य टोपी के पक्ष में हैं और कुछ अन्य दूसरी चीजों के पक्ष में हैं।

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What is paramount? nation or religion, asks Madras High Court

What is paramount? nation or religion, asks Madras High Court

चेन्नई.

मद्रास हाईकोर्ट ने देश में कुछ ताकतों द्वारा धार्मिक असौहाद्र्र पैदा करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गुरुवार को गंभीर चिंता प्रकट की और हैरानगी जताते हुए कहा कि क्या सर्वोपरि है-‘राष्ट्र या धर्म।’ कर्नाटक में हिजाब से जुड़े विवाद को लेकर छिड़ी बहस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी और न्यायमूर्ति डी भरत चक्रवर्ती की प्रथम पीठ ने कहा कि कुछ ताकतों ने ‘ड्रेस कोड’ को लेकर विवाद उत्पन्न किया है और यह पूरे भारत में फैल रहा है।

पीठ ने कहा कि यह सचमुच में स्तब्ध करने वाला है, कोई व्यक्ति हिजाब के पक्ष में है, कुछ अन्य टोपी के पक्ष में हैं और कुछ अन्य दूसरी चीजों के पक्ष में हैं। यह एक देश है या यह धर्म या इस तरह की कुछ चीज के आधार पर बंटा हुआ है। यह आश्चर्य की बात है। न्यायमूर्ति भंडारी ने भारत के पंथनिरपेक्ष देश होने का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा विवाद से कुछ नहीं मिलने जा रहा है लेकिन धर्म के नाम पर देश को बांटने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कुछ जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणियां कीं।


मद्रास हाईकोर्ट ने यूट्बर मारीदास के खिलाफ निजी शिकायत खारिज की
चेन्नई. मद्रास हाईकोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोध प्र्दशन के वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करने वाले मशहूर यूट्यूबर मारीदास के खिलाफ दायर की गई एक निजी शिकायत गुरूवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने तुत्तुकुडी के मजिस्ट्रेट संख्या 111 के समक्ष दायर की गई इस याचिका को खारिज कर दिया है। यह निजी शिकायत तुत्तुुकुडी के डीएमके नेता एस.आर.एस. के उमरी शंकर की ओर से दायर की गई थी जिसमें जिन्होंने कहा है कि मारीदास ने वीडियो के माध्यम से पार्टी और उनके परिवार के सदस्यों का अपमान करते हुए उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल किया है। इस बीच मारीदास का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने तर्क दिया कि आरोप पूरी तरह से झूठा था और मामला जानबूझकर उनके खिलाफ लगाया गया है। मारीदास ने अपने वकील के माध्यम से कहा कि मामला जानबूझकर बनाया गया है क्योंकि वह सामाजिक तौर पर सक्रिय हैं और सामाजिक मुद्दों के बारे में लोगों को जागरूक करते रहे हैं।

मारीदास ने कहा कि उनके खिलाफ मौजूदा मामला उनकी आवाज दबाने का एक प्रयास है।