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रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कही मन की बात, तो पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) पर दिया बड़ा बयान

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों अपनी शादी को लेकर चर्चा में हैं। अब उन्होंने अयोध्या में तैयार हुए भव्य राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को होने जा रही भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर अपने मन की इच्छा जाहिर की है.. वहीं पाक अधिकृत कश्मीर को लेकर बड़ा बयान भी दिया है...

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बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कन्या विवाह सम्मेलन के आयोजन की घोषणा की। पंडित शास्त्री ने बताया कि 1 से 8 मार्च 2024 के बीच 108 कन्याओं का सामूहिक विवाह होगा। इस बार विवाह के बाद उपहार में घर गृहस्थी के सामान के साथ एक बाइक भी दी जाएगी। उन्होंने मार्च में कैंसर अस्पताल के लिए स्थान चिंहित करने और 2029 तक अस्पताल का निर्माण पूरा कराने की मंशा भी जाहिर की। साथ ही बागेश्वर धाम परिक्षेत्र के अंतर्गत समस्त समस्त सनातनियों की आस्था और बागेश्वर धाम पर बढ़ती हुई भीड़ को देखते हुए यहां पर सरकार के साथ मिलकर एक ऐसे कॉरिडोर का निर्माण कराने जा रही है। जिससे आने वाले भक्तों को किसी भी तरह की कोई असुविधा न हो।

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि, 'राम मंदिर अब तक की भारतीय सनातनियों की सबसे बड़ी जीत है। दूसरी बात करोड़ों लोगों की आस्था के आराध्य प्रभु श्री राम 22 जनवरी को झुग्गी झोपड़ी से उठकर भव्य मंदिर में विराजमान होंगे। मेरे मन में तो आ रहा है कि उस दिन महात्माओं को रसगुल्ला खिलाऊं, खुद खाऊं और फिर जय श्री राम वाला गीत बजाकर डांस कर लिया जाए। इससे लाख गुणा ज्यादा प्रसन्न हमारे वीर हनुमान जी होंगे।'

उन्होंने कहा कि राम मंदिर में सबसे बड़ी भूमिका उनकी है, जिन्होंने अपने प्राणों का बलिदानी दिया, जिन्होंने राम मंदिर बनाने के लिए अपने प्राण त्याग दिए, जगतगुरू रामभद्राचार्य की है, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर प्रमाण दिया था, इसमें भूमिका हमारे प्रधानमंत्री और आरएसएस की है।

ऐसे नहीं तो ललकार करके ले लेंगे

पीओके को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अपने बाप की चीज नहीं मांगेंगे तो क्या दूसरों की मांगेगे? पीओके अपने बाप की बपौती है। हम उतने मजबूत नहीं हैं, नहीं तो ललकार कर ले लेंगे। वर्तमान भारत सरकार में उतनी दम है। वर्तमान प्रधानमंत्री में इतनी सामर्थता है, भारतीय नागरिक होने के नाते हमने वोट डाला है।

हमारी मांग है कि इसे वापस मिलाया जाए। जितनी हमारी सामर्थता है, हम आचार्य परंपरा को मानने वाले हैं, इसलिए वर्तमान भारत सरकार प्रयास करे हम प्रभु से प्रार्थना करेंगे और मिशन सक्सेसफुल होगा।