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छतरपुर

जिले के भूजल में फ्लोराइड, आर्सेनिक, लोहा की मात्रा खतरनाक स्तर पर, स्वास्थ के लिए हानिकारक

पूरे जिले में क्षमता से अधिक भूजल का उपयोग किया जा रहा है। नतीजतन छतरपुर शहर, नौगांव समेत बकस्वाहा भूजल दोहन के मामले में क्रिटिकल स्टेज पर आ गए हैं।

छतरपुरJun 12, 2024 / 10:42 am

Dharmendra Singh

groundwater

सेंट्रल भूजल बोर्ड का मैप

छतरपुर. जिले का भूजल स्तर नीचे गिरने के साथ ही खतरनाक भी हो गया है। सेन्ट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में फ्लोराइड, आर्सेनिक, नाइट्रेट और लोहा की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। भू-जल में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 मिलीग्राम, नाइट्रेट 1.5 मिलीग्राम, आर्सेनिक 0.5 मिलीग्राम और लोहा की मात्रा 1.0 मिली ग्राम से ज्यादा प्रति लीटर हो गई है। इन तत्वों की मात्रा तय मानक से अधिक होने से भूजल पीने के लिहाज से खतरनाक हो गया है।
भूजल रिचार्ज से दोहन ज्यादा


पूरे जिले में क्षमता से अधिक भूजल का उपयोग किया जा रहा है। नतीजतन छतरपुर शहर, नौगांव समेत बकस्वाहा भूजल दोहन के मामले में क्रिटिकल स्टेज पर आ गए हैं। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 61 फीसदी भूजल रिचार्ज होता है, जबकि अलग-अलग शहरों में 80 प्रतिशत तक भूजल निकाला जा रहा है। इससे हर साल भूजल स्तर तीन से चार मीटर कम हो रहा है। सबसे ज्यादा बुरी स्थिति नगरीय निकायों में है। यहां क्षमता से अधिक भूजल का दोहन हो रहा है। नौगांव में 80.99 फीसदी, छतरपुर शहर में 73.17 फीसदी तो बकस्वाहा में 80.92 फीसदी भूजल का उपयोग हो रहा है। बड़ामलहरा में ये आंकड़ा 59.31 और राजनगर में 62.38 फीसदी है। लवकुशनगर में 65.54 फीसदी भूजल का दोहन हो रहा है।
बकस्वाहा, छतरपुर, नौगांव सेमी क्रिटिकल


सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने जिले में भूजल दोहन के मामले में केवल बड़ामलहरा को सेफ जोन में रखा है। क्योंकि यहां भूजल का दोहन 59.31 प्रतिशत है। वहीं, बिजावर ब्लॉक को भूजल के 71.22 प्रतिशत दोहन के साथ सेमी क्रिटीकल जोन में रखा गया है। वहीं, बकस्वाहा में भूजल का 80.92 प्रतिशत दोहन हो रहा है। छतरपुर ब्लॉक में दोहन का प्रतिशत 73.17 होने से छतरपुर भी सेमी क्रिटिकल जोन में है। नौगांव भी 80.99 फीसदी दोहन के साथ सेमी क्रिटिकल जोन में है। राजनगर को सेफ जोन में रखा गया है। लवकुशनगर ब्लॉक भी सेफ जोन में है। सबसे कम गौरिहार में भू जल का दोहन किया जा रहा है। 29.19 फीसदी दोहन के कारण गौरिहार क्षेत्र भी सेफ जोन में है।
औसत बारिश भी घटी


पिछले साल बारिश औसत से 10 इंच कम होने से कम होने से छतरपुर जिला यलो जोन में आ गया। जबकि उसके एक साल पहले प्रदेश के 9 जिलों में छतरपुर भी रेड जोन में आ गया था। जिले की औसत बारिश 42.3 इंच की तुलना में जिले में इस बार केवल 32.2 इंच बारिश हुई है। मानसून की बेरुखी के चलते जिले के बांध इस बार आधे भी नहीं भर पाए हैं, जिससे सिंचाई और बोरबेल के जरिए पीने के पानी पर आश्रित लोगों ने भू जल का दोहन खूब किया है।
फैक्ट फाइल


ब्लॉक भूजल स्तर (मीटर में)
छतरपुर 16.22
नौगंाव 16.65
बिजावर 18.20
राजनगर 16.18
बकस्वाहा 16.45
लवकुशनगर 12.42
बड़ामलहरा 10.85
गौरिहार 10.42

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