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भोपाल में फाइलों में दबा छतरपुर के आधुनिक बस स्टैंड का सपना, 1 साल से अटकी पीपीआर, 5 साल की देरी से 15 करोड़ रुपए बढ़ी प्रोजेक्ट की लागत

वर्ष 2021 से जिस परियोजना की कवायद शुरू की गई थी, वह पांच साल बीत जाने के बाद भी कागजी औपचारिकताओं से बाहर नहीं निकल पाई है।
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आईएसबीटी के लिए प्रस्तावित स्थल

शहर के लोगों को एक सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक अंतर-राज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) का लाभ मिलने का सपना वर्ष दर वर्ष केवल लचर प्रशासनिक प्रणाली और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। वर्ष 2021 से जिस परियोजना की कवायद शुरू की गई थी, वह पांच साल बीत जाने के बाद भी कागजी औपचारिकताओं से बाहर नहीं निकल पाई है। विडंबना यह है कि जब लंबे विवाद के बाद बस स्टैंड के निर्माण का स्थान फाइनल हुआ, तो अब फाइलें भोपाल में राज्य सरकार की सशक्त समिति (अधिकार समिति) के पास जाकर अटक गई हैं।

1 साल से फाइल पर नहीं लगी मुहर, प्रक्रिया पूरी तरह ठप

हाउसिंग बोर्ड द्वारा आईएसबीटी के निर्माण के लिए तैयार की गई प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन (पीपीआर) को भोपाल भेजे हुए पूरा एक साल बीत चुका है। लेकिन अब तक इसे अधिकार समिति से मंजूरी नहीं मिल सकी है। इस प्रशासनिक लेटलतीफी का असर यह हुआ है कि परियोजना का अगला चरण पूरी तरह रुक गया है। जब तक पीपीआर को मंजूरी नहीं मिलती, तब तक न तो प्रोजेक्ट की विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर) तैयार की जा सकती है और न ही ड्राइंग-डिजाइन या कंसल्टेंसी सेवाओं के लिए ऑनलाइन टेंडर जारी किए जा सकते हैं।

बगौता से सौरा तक का सफर: विवाद तो सुलझा पर काम नहीं बढ़ा

छतरपुर में नए बस स्टैंड को लेकर शुरुआत से ही नीतिगत स्पष्टता का अभाव देखने को मिला। पहले सौंरा फिर वर्ष 2021 में सबसे पहले बगौता में आईएसबीटी बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, स्थान चयन को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच खींचतान व लंबा विवाद चला। आखिरकार आपसी सहमति बनने के बाद सौरा स्थित केंद्रीय विद्यालय के पीछे की भूमि को अंतिम स्थान के रूप में चुना गया। उम्मीद थी कि स्थान तय होने के बाद निर्माण कार्य तेजी पकड़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

देरी की वजह से 15 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

प्रशासनिक सुस्ती और वर्षों की देरी का सबसे बड़ा खामियाजा सरकारी खजाने और आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। हाउसिंग बोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में परियोजना की लागत में भारी उछाल आया है। निर्माण सामग्री और प्रक्रियात्मक दरों में हुई वृद्धि के कारण इस प्रोजेक्ट की लागत में लगभग 15 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ बढ़ चुका है। पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत बनने वाले इस टर्मिनल का कुल बजट अब करीब 70 करोड़ रुपए अनुमानित किया गया है।

आईएसबीटी परियोजना

प्रस्तावित स्थल- सौरा, केंद्रीय विद्यालय के पीछे (छतरपुर)

परियोजना का प्रकार- पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत निर्माण

लागत में वृद्धि- 5 वर्षों की देरी से करीब 15 करोड़ रुपए का इजाफा

वर्तमान अनुमानित बजट- लगभग 70 करोड़ रुपए

अड़चन- 1 वर्ष से भोपाल स्तर पर पीपीआर फाइल की मंजूरी लंबित

लंबित चरण- डीपीआर निर्माण, ड्राइंग-डिजाइन और टेंडर प्रक्रिया

अनुमोदन के बाद ही शुरू होंगे टेंडर

प्रोजेक्ट का पीपीआर पिछले एक साल से भोपाल में अधिकार समिति के पास अनुमोदन के लिए लंबित है। वहां से प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही डीपीआर, ड्राइंग-डिजाइन और टेंडर प्रक्रिया का काम तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

एमएल अहिरवार, कार्यपालन यंत्री, हाउसिंग बोर्ड