
खरीदी केंद्र पर भीगा गेहूं
छतरपुर जिले में समर्थन मूल्य पर हो रही गेहूं खरीदी के दौरान प्रशासन और प्रबंधन की घोर लापरवाही सामने आई है। बीते दिन हुई तेज बारिश के कारण सटई रोड मंडी, गौरगाय और गठेवरा जैसे मुख्य केंद्रों पर खुले आसमान के नीचे रखा हजारों क्विंटल गेहूं भीग गया। चौंकाने वाली बात यह है कि जब आसमान से आफत बरस रही थी और किसानों का अनाज बर्बाद हो रहा था, तब जिम्मेदार अधिकारी केंद्रों से नदारद थे।
सटई रोड स्थित कृषि उपज मंडी में अव्यवस्था का आलम यह रहा कि बारिश के दौरान हजारों क्विंटल गेहूं भीग गया, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे।
नुकसान की स्थिति: केंद्र पर करीब 6 हजार क्विंटल गेहूं रखा था।तुलाई के दौरान हुई अचानक बारिश से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और परिसर में खड़े ट्रकों में रखा गेहूं पानी की चपेट में आ गया।
किसानों ने नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि गेहूं की सफाई छलनी के बजाय वैक्यूम क्लीनर की हवा से की जा रही है, जिससे अनाज की गुणवत्ता खराब हो सकती है।स्लॉट की समस्या: किसानों का आरोप है कि शुरुआत में केवल छोटे किसानों के स्लॉट बुक किए गए, जिससे बड़े किसान लंबे समय तक परेशान रहे।
2 हजार क्विंटल गेहूं हुआ खराबजिला मुख्यालय के पास ग्राम गौरगाय में स्थित केंद्र पर प्रबंधन की सबसे बड़ी लापरवाही दिखी।परिवहन में देरी: खरीदे गए अनाज को नियमानुसार तत्काल गोदाम भेजा जाना चाहिए था, लेकिन उठाव न होने के कारण करीब 2 हजार क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा रहा।चेतावनी को किया नजरअंदाज: मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद तिरपाल या ढंकने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। अब इस अनाज में फफूंद लगने और दाना सड़ने का खतरा बढ़ गया है, जिससे सरकारी भंडारण को बड़ा नुकसान होगा।
गठेवरा केंद्र: किसानों की बर्बादी और जिम्मेदारों का जश्नगठेवरा खरीदी केंद्र में भी टीन शेड न होने के कारण भारी मात्रा में गेहूं भीग गया। यहां किसानों ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है:
जश्न में डूबे अधिकारी: किसानों के अनुसार, जब तेज बारिश में उनका अनाज भीग रहा था, तब समिति प्रबंधक अपनी रिटायरमेंट पार्टी मना रहे थे, जिसमें कई बड़े अधिकारी शामिल थे।
समिति का पक्ष:हालांकि, समिति प्रबंधक का कहना है कि वर्तमान में केंद्र पर 4933 क्विंटल गेहूं सुरक्षित करने के लिए पन्नी का उपयोग किया गया है।
इस वर्ष सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपए तय किया है, जिसमें 40 रुपए बोनस मिलाकर कुल 2625 रुपए प्रति क्विंटल किसानों को मिलने हैं। लेकिन खरीदी केंद्रों पर व्याप्त इस अव्यवस्था ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।प्रशासन से मांगजिले भर के किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी केंद्रों पर पर्याप्त टीन शेड, तिरपाल और मजदूरों की व्यवस्था की जाए। साथ ही, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और समिति प्रबंधकों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे उग्र प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे।
Published on:
02 May 2026 10:29 am
