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सीएम से शुभारंभ के 25 दिन बाद आखिरकार शुरू हुई ई-लाइब्रेरी, पंजीयन और स्टाफ नियुक्ति में फंसा रहा मामला

उद्घाटन के मंच से इसे छतरपुर के युवाओं के लिए सुनहरे अवसरों का द्वार बताया गया, मगर हकीकत यह रही कि करीब 25 दिनों तक यह आधुनिक भवन बंद पड़ा रहा।
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लाइब्रेरी में पहुंचे छात्र

शहर की बहुचर्चित ई-लाइब्रेरी आखिरकार छात्रों के लिए खोल दी गई, लेकिन यह सफर आसान नहीं रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सामाजिक अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने 30 अगस्त को इसका भव्य उद्घाटन किया था। उद्घाटन के मंच से इसे छतरपुर के युवाओं के लिए सुनहरे अवसरों का द्वार बताया गया, मगर हकीकत यह रही कि करीब 25 दिनों तक यह आधुनिक भवन बंद पड़ा रहा। वजह थी, पंजीयन प्रक्रिया और स्टाफ की नियुक्ति में हुई देरी।

5 करोड़ की लागत से बनी है अत्याधुनिक ई-लाइब्रेरी

नीति आयोग की आकांक्षी जिला योजना के तहत 5 करोड़ रुपए की लागत से सिंचाई कॉलोनी परिसर में यह ई-लाइब्रेरी तैयार की गई है। भवन आधुनिक डिजाइन और सुविधाओं से लैस है। यहां कंप्यूटर लैब, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, डिजिटल कैटलॉग और बैठने के लिए वातानुकूलित हॉल बनाए गए हैं। अधिकारियों का दावा है कि यह सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि डिजिटल लर्निंग और टेक्नोलॉजी स्किल डेवलपमेंट का भी केंद्र बनेगी।

उद्घाटन के बाद ताले लटके रहे, छात्र निराश

भव्य मंच, फूलमालाएं और बड़े नेताओं के भाषण के बीच ई-लाइब्रेरी के उद्घाटन के दिन छात्रों और अभिभावकों में जबर्दस्त उत्साह था। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं ने इसे शहर की सबसे बड़ी शैक्षणिक सौगात करार दिया। लेकिन उद्घाटन के अगले ही दिन दरवाजों पर ताले जड़े रहे। लगभग चार हफ्तों तक लाइब्रेरी का मुख्य गेट बंद रहा। इस बीच छात्रों में मायूसी और प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठे।

प्रशासनिक प्रक्रिया बनी सबसे बड़ी अड़चन

नगरपालिका अधिकारियों के मुताबिक लाइब्रेरी के ग्रंथालय के रूप में पंजीयन और स्टाफ की नियुक्ति में अपेक्षा से अधिक समय लग गया। सब-इंजीनियर आमिर खान का कहना है, रजिस्ट्रेशन और नियुक्ति की औपचारिकताएं पूरी करने में हफ्ता-दस दिन का समय गया। अब सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और लाइब्रेरी नियमित संचालन के लिए खुल चुकी है।सिर्फ सात छात्र पहुंचेगुरुवार को जब आखिरकार लाइब्रेरी खोली गई तो वहां केवल सात छात्र ही मौजूद मिले। छात्र डिजिटल टेबल और इंटरनेट की सुविधा का लाभ लेते दिखे, लेकिन सबसे बड़ा संकट किताबों का नजर आया। ग्रंथ संग्रह बेहद सीमित है और छात्रों ने मांग की कि जल्द से जल्द प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी किताबें और रेफरेंस मैटेरियल उपलब्ध कराया जाए।

छात्रों की प्रतिक्रिया: भवन भव्य है, पर किताबें कहां हैं?

राज्य सेवा की तैयारी कर रही छात्र महेश दुबे ने कहा, हमें उम्मीद थी कि यहां हर तरह की किताबें और गाइड मिलेंगी। भवन और कंप्यूटर अच्छे हैं, लेकिन किताबों का संग्रह बहुत कम है। अगर समय रहते किताबें नहीं आईं तो यह सुविधा अधूरी रह जाएगी। वहीं इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे छात्र अभिषेक नामदेव ने कहा, हमारे लिए इंटरनेट और वाई-फाई उपयोगी है, पर लाइब्रेरी का मकसद तभी पूरा होगा जब यहां अद्यतन पाठ्य सामग्री उपलब्ध हो।

अधिकारियों का दावा: धीरे-धीरे होगा विस्तार

नगरपालिका और जिला प्रशासन का कहना है कि शुरुआत में सीमित संसाधनों के साथ लाइब्रेरी खोली गई है, लेकिन आगामी माह में नई किताबों की खेप मंगाई जाएगी। इसके अलावा छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए डिजिटल सब्सक्रिप्शन और ऑनलाइन कोर्सेस भी उपलब्ध कराने की योजना है।