
कानपुर-सागर नेशनल हाइवे की गड्ढेदार टोल रोड
कानपुर-सागर नेशनल हाइवे (एनएच-39) का हाल इन दिनों बेहद खस्ता है। करोड़ों खर्च कर बनी नई सडक़ अभी कुछ ही महीनों में जगह-जगह से उखडकऱ गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। स्थिति यह है कि कई स्थानों पर पुरानी सडक़ की परतें साफ नजर आने लगी हैं। इसके बावजूद मुंगवारी टोल प्लाजा पर वाहनों से टोल टैक्स वसूली जारी है। वाहन चालक और स्थानीय लोग इसे खुली लूट बताते हुए सवाल उठा रहे हैं कि जब सडक़ सुरक्षित और सुगम नहीं है तो आखिरकार टोल वसूली किस आधार पर की जा रही है।
नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 1 अप्रेल 2025 से प्रभावी नई टोल दरें लागू की हैं, जो 31 मार्च 2026 तक मान्य रहेंगी। इसके तहत चार पहिया वाहन पर प्रति चक्कर 5 रुपए बढ़ाए गए हैँ। जबकि गड्ढेदार सडक़ पर टोल वसूलने को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक फटकार लगा चुका है। हर श्रेणी के वाहन पर भारी-भरकम टोल वसूली तो हो रही है, लेकिन बदले में यात्रियों को गड्ढों से भरी सडक़ और जानलेवा सफर ही मिल रहा है।
कार/जीप/वैन- 40 रुपए एकतरफा, 60 रुपए वापसी यात्रा, 1350 रुपए मासिक पास, स्थानीय वाणिज्यिक वाहन से 20 रुपए।
हल्के वाणिज्यिक वाहन - 65 रुपए एकतरफा, 100 रुपए वापसी यात्रा, 2180 रुपए मासिक पास।
बस/ट्रक- 135 रुपए एकतरफा, 205 रुपए वापसी यात्रा, 4565 रुपए मासिक पास।
3 एक्सल वाहन - 150 रुपए एकतरफा, 225 रुपए वापसी यात्रा, 4980 रुपए मासिक पास।
4 से 6 एक्सल वाहन - 215 रुपए एकतरफा, 320 रुपए वापसी यात्रा, 7160 रुपए मासिक पास।
7 या अधिक एक्सल - 260 रुपए एकतरफा, 390 रुपए वापसी यात्रा, 8715 रुपए मासिक पास।
कानपुर-सागर नेशनल हाइवे पर मुगंवारी से लेकर साठिया घाट तक के आसपास हाइवे पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश के दिनों में इनमें पानी भर जाने से सडक़ और खतरनाक हो जाती है। कई जगह पैचवर्क की औपचारिकता तो की गई है, लेकिन यह टिकाऊ नहीं साबित हो रहा। आलम यह है कि ट्रकों और बसों के साथ छोटे वाहन भी गड्ढों में फंसकर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सडक़ पर न तो पर्याप्त स्ट्रीट लाइट हैं, न ही इमरजेंसी मेडिकल सुविधा। कई जगह कट और डायवर्जन भी बिना संकेतक के छोड़े गए हैं। इसके चलते रात में हादसों का खतरा और बढ़ जाता है। वाहन चालक लगातार यह मांग कर रहे हैं कि जब तक सडक़ को दुरुस्त नहीं किया जाता, तब तक टोल की वसूली बंद होनी चाहिए।
नेशनल हाइवे अथॉरिटी के स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि सडक़ की मरम्मत का काम ठेकेदार के जिम्मे है। गारंटी पीरियड में होने के बावजूद सुधार कार्य धीमा है। फिलहाल पैचवर्क कराया जा रहा है, लेकिन स्थाई समाधान के लिए बड़े स्तर पर डामरीकरण की योजना बनाई जा रही है।
Published on:
26 Aug 2025 10:40 am
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