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Education: जिले के 16 में से 15 कॉलेज में नहीं है संस्कृत विषय में मास्टर डिग्री की सुविधा

संस्कृत में विद्यार्थी कैसे बनेंगे विद्वान, शासन सेल्फ फाइनेंस पर दे रहा जोर

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छिंदवाड़ा. उच्च शिक्षा विभाग कॉलेजों में रोजगार परक विषयों के अध्ययन को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन उनकी प्राथमिकता में संस्कृत विषय नहीं है। देववाणी कही जाने वाली संस्कृत भाषा जिले में उपेक्षा की शिकार हो गई है। शायद यही वजह है कि जिले में स्थित 16 शासकीय कॉलेज में से 15 में संस्कृत विषय में मास्टर डिग्री की सुविधा नहीं है। छिंदवाड़ा मुख्यालय में स्थित राजमाता सिंधिया गल्र्स कॉलेज में संस्कृत विषय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की जा सकती है। जबकि इस कॉलेज में केवल छात्राएं ही पढ़ती हैं। ऐसे में छिंदवाड़ा जिले के छात्रों को संस्कृत विषय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के लिए दूसरे जिले का रूख करना पड़ रहा है या फिर प्राइवेट पढ़ाई के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिले के लीड कॉलेज यानी प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस(शासकीय स्वशासी पीजी कॉलेज)के रूप में भी वर्षों से यह सुविधा नहीं है। लोगों की मांग पर कॉलेज प्रबंधन ने कई बार उच्च शिक्षा विभाग का प्रस्ताव भेजा। संस्कृत विषय से स्नातकोत्तर पढ़ाई की अनुमति मांगी गई, लेकिन विभाग ने इस पर आज तक विचार नहीं किया। पीजी कॉलेज वर्ष 1961 से संचालित हो रहा है। तब से लेकर अब तक कई बार स्नातकोत्तर में संस्कृत विषय की अनुमति के लिए प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में ही चला गया।

सुविधा बिना कैसे मिलेंगे संस्कृत विद्वान
पातालेश्वर मंदिर के पुजारी पं. तिलक गोस्वामी का कहना है कि संस्कृत भाषा का महत्व कल, आज और कल हर समय रहेगा। बदलते समय के साथ यह भाषा थोड़ी विलुप्त हुई थी, लेकिन अब नहीं। पूजा-पाठ या फिर अन्य कर्मकांड के लिए संस्कृत विद्वान को ही तवज्जों दी जाती है। संस्कृत विषय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की सुविधा जिले के कॉलेजों में होनी चाहिए। इसके प्रोत्साहन के लिए सरकार को कदम उठाना चाहिए। रोजगार परक पाठ्यक्रमों की शुरुआत करनी चाहिए। एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के जरिए आधुनिक विषयों का समावेश करना चाहिए। संस्कृत को लोकप्रिय भाषा बनाने के उद्देश्य से कई कदम उठाने पड़ेंगे।

सेल्फ फाइनेंस योजना से मिल जाएगी स्वीकृति
बताया जाता है कि उच्च शिक्षा विभाग स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत संस्कृत विषय में स्नातकोत्तर करने की सुविधा कॉलेजों को दे रहा है। हालांकि अगर कॉलेजों ने इस योजना को स्वीकार कर लिया तो विद्यार्थियों को काफी अधिक फीस देनी होगी। इससे विद्यार्थियों पर बोझ बढ़ेगा।

विद्यार्थी कर रहे डिमांड
जिले के कॉलेजों में स्नातक में तो संस्कृत विषय है, लेकिन स्नातकोत्तर में नहीं। जबकि छिंदवाड़ा के कई क्षेत्रों में विद्यार्थी संस्कृत पढऩा चाहते हैं एवं मास्टर डिग्री करना चाहते हैं। लेकिन विभाग की बेरूखी की वजह से संस्कृत की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। दूरदराज इलाकों के छात्रों के लिए तो संस्कृत की पढ़ाई एक सपना बन कर रह गया है।

इनका कहना है…
पूर्व में संस्कृत विषय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए उच्च शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। उसमें आगे की क्या प्रक्रिया हुई इस संबंध में दिखवाता हूं।
डॉ. लक्ष्मीचंद, प्राचार्य, लीड कॉलेज, छिंदवाड़ा