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बॉन्ड भराकर 40 डॉक्टरों को भेजा भोपाल से, ज्वाइन कर हो गए गायब

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में किए जाने हैं पदस्थ, 30 तारीख तक का दिया गया अंतिम समय, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा बढ़ाने प्रयास

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छिंदवाड़ा. स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश भर में दूरस्थ व ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में 2853 बॉण्डेड डॉक्टरों की नियुक्ति कर स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया है। लेकिन इस महत्वकांक्षी कार्य को यह डॉक्टर पलीता लगाने में जुटे हुए है। जिले को 40 डॉक्टर मिले है जिन्हें जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिविल अस्पताल में पदस्थ किए जाने है। स्वास्थ्य विभाग ने अनिवार्य बंधपत्र सेवा के तहत सभी सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस व पीजी कर निकले डॉक्टरों के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ करने के आदेश जारी किए है।

जिले में 40 डॉक्टरों में से कुछ डॉक्टरों ने ज्वाइन किया, जिसके बाद विभाग ने इन्हें नोटिस जारी किया तो पचास फीसदी डॉक्टरों ने ज्वाइन किया तथा उसके बाद फिर डॉक्टर लापता हो गए। जिसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में पहले जैसी स्थिति बनने लगी थी। विभाग ने अब इन डॉक्टरों को 30 अगस्त तक का अंतिम समय देते हुए पदस्थापना वाले स्थान पर ज्वाइन करने के आदेश दिए है।

कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अभी भी खाली


डॉक्टरों की कमी दूर करने के उद्देश्य से विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा सिविल अस्पताल में डॉक्टर पदस्थ किए गए है। वर्तमान में जिले में 68 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापना के बाद भी कई स्थान जैसे पाथरी, कुंडा, रामपुर, पांजरा, हिरदागढ़, मारूड़, बाघवर्दिया, देलाखारी, चावलपानी में डॉक्टर नहीं है, यहां पर स्वास्थ्य व्यवस्था नर्सिंग स्टॉफ के भरोसे रहती है।

अमरवाड़ा, हर्रई में सबसे ज्यादा कमी


डॉक्टरों की सबसे ज्यादा कमी अमरवाड़ा, हर्रई जैसे दूरस्त आदिवासी अंचल में बनी हुई है। जितने पद स्वीकृत है उससे आधे पद वर्तमान में नहीं भरे हुए है। हर्रई ब्लॉक की बात करे तो 26 डॉक्टरों के पदों में से सिर्फ 08 डॉक्टर कार्यरत है। अमरवाड़ा ब्लॉक में भी 24 में से 21 पद रिक्त है। ब्लॉक मुख्यालय पर डॉक्टर तो मिल जाते है लेकिन दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं होने पर व्यवस्थाएं बिगड़ती है।

सभी जगह है विशेषज्ञ की कमी


जिले के शासकीय अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के पद स्वीकृत है लेकिन पद रिक्त पड़े हुए है। कहीं पर शिशु रोग, नेत्र रोग, मेडिकल ऑफिसर, स्त्री रोग विशेषज्ञ, सर्जिकल विशेषज्ञ तथा अन्य की कमी बनी हुई है। डॉक्टर की कमी होने पर मरीजों को जिला मुख्यालय के अस्पताल भेजा जाता है या फिर मरीज प्राइवेट अस्पताल में पहुंचकर उपचार कराता है। कहने के लिए कई अस्पतालों में डिलेवरी पाइंट बनाए गए है लेकिन विशेषज्ञ ही नहीं है तो उपचार कैसे संभव होगा।

इनका कहना है।


जिन डॉक्टरों की पदस्थापना जिले के पीएससी सेंटरों में हुई थी, जिनमें से कई ज्वाइन कर अवकाश तथा पीजी करने चले गए थे। उन्हें शासन के आदेश पर 31 अगस्त तक ज्वाइन करना है। जिन स्थानों पर डॉक्टरों की कमी है वहां के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।


डॉ नरेश गुन्नाड़े, प्रभारी सीएमएचओ, छिंदवाड़ा।

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