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Big shiv temple: 81 फीट ऊंची शिव प्रतिमा, नाम है रामेश्वर धाम

ध्यान मुद्रा में विराजमान हैं शिव, बढ़ रही ख्याति

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छिंदवाड़ा. सावन माह का पांचवां एवं अंतिम सोमवार पर शिवालयों में भक्तों का तांता लगेगा। जगह-जगह शिव अभिषेक होंगे। जिले में वैसे तो कई शिवालय हैं जिनकी प्रसिद्धी दूर-दूर तक फैली हुई है। इसी में से एक है छिंदवाड़ा-सिवनी सडक़ मार्ग पर मुख्यालय से 17 किमी दूर सिहोरामाल में स्थित ‘रामेश्वर धाम’। यहां शिवजी ध्यान मुद्रा में विराजमान हैं। बताया जाता है कि यह प्रदेश की सबसे ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा है। जमीन से इसकी ऊंचाई 81 फीट है। मूर्ति के नीचे विशाल मंदिर भी बनाया गया है। शिव प्रतिमा तक पहुंचने के लिए 31 सीढिय़ां बनाई गई हैं। मंदिर का डिजाइन श्रीयंत्र की तरह ही है। सितंबर 2023 में जगतगुरु स्वामी रामभ्रदाचार्य महाराज ने पूजन किया था। इसके बाद श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ मंदिर के पट खोल दिए गए। रामेश्वर धाम की आधारशिला आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 24 अप्रैल 2018 को रखी थी। मंदिर परिसर में वैदिक पद्धति से 101 पुरोहितों ने पूजा अर्चना की थी। लगभग 4 एकड़ में बने इस धाम में हर दिन भक्तों का तांता लगता है। इस प्रतिमा में भगवान शिव ध्यान मुद्रा में विराजे हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए दो एकड़ जमीन केवल पार्किंग के लिए रिजर्व है। मंदिर में श्रीराम दरबार, देवी लक्ष्मी, विष्णु, दुर्गा माता सहित अन्य प्रतिमाओं की स्थापना की गई है। बताया जाता है कि मूर्ति को बनाने में 80 टन से अधिक लोहे का इस्तेमाल किया गया है। भगवान शंकर की यह मूर्ति फाइबर से बनाई गई है।

अंक ज्योतिष के आधार पर ऊंचाई
शिव मंदिर की ऊंचाई अंक ज्योतिष के आधार पर दी गई है। जमीन से 13 फीट ऊंचाई वाला हॉल बनाया गया है। इसके बाद भगवान शिव की प्रतिमा की ऊंचाई 56 फीट है। दरअसल अंक ज्योतिष के अनुसार मूर्ति की ऊंचाई का मूलांक 9 आना चाहिए, इसलिए इसकी ऊंचाई 81 फीट रखी गई है।

विभिन्न प्रदेशों से आए थे कारीगर
बताया जाता है दिल्ली, राजस्थान, नागपुर सहित अन्य प्रदेशों से आई टीम ने मूर्ति तैयार की है। मंदिर बनाने के लिए लाल रंग के पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। रेड स्टोन मंदिर की भव्यता को बढ़ा रहा है। बताया जाता है कि रेड स्टोन आकार लेने से पहले कच्चा होता है। धीरे-धीरे हवा पानी के संपर्क में आने पर मजबूत होता जाता है।