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ARTIST: दिल्ली से आए शिवजी और पार्वती, कला से मोह रहे भक्तों का मन

शिव महापुराण कथा में कलाकार दिखा रहे सशक्त अभिनय

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ARTIST:  दिल्ली से आए शिवजी और पार्वती, कला से मोह रहे भक्तों का मन

ARTIST: दिल्ली से आए शिवजी और पार्वती, कला से मोह रहे भक्तों का मन

छिंदवाड़ा. दिल्ली से आए छह सदस्यीय युवाओं की टीम इन दिनों दशहरा मैदान में आयोजित हो रहे शिव महापुराण कथा में भक्तों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। दरअसल यह युवा कलाकार हैं और अपने सशक्त अभिनय का प्रदर्शन कर रहे हैं। शिव महापुराण कथा में विभिन्न भूमिकाओं का निर्वहन कर रहे हैं। कोई शिवजी का स्वरूप धारण कर रहा है तो कोई पार्वती तो कोई कृष्ण, राधा और महाकाल का। ग्रुप के लीडर अमनप्रिंस ने बताया कि वे सभी बाल्यावस्था से ही विभिन्न भूमिका निभा रहे हैं। हर सदस्य के परिवार में पहले से ही कोई न कोई काम करता रहा है। अमनप्रिंस ने बताया कि उनके चाचा इस काम को करते थे और उन्हीं को देखकर अभिनय सीखा और फिर धीरे-धीरे छोटी से लेकर बड़ी भूमिका निभाने लगे। बाल्यावस्था से ही इसमें रम गए। पढ़ाई के साथ ही इस काम को करते रहे। पहले बचपन में एक शौख था, लेकिन धीरे-धीरे जब समझदार हुए तब इसकी अहमितता समझ में आई और फिर भक्ति भावना से जुड़ गए। ग्रुप के सभी सदस्यों का कहना है कि हम खुशनशीब हैं जो भगवान से हमें इसकेलिए चुना है। भगवान की भक्ति के साथ अपनी कला से हम लोगों का दिल जीत रहे हैं यह हमारा सौभाग्य है। ग्रुप के कलाकार भगवान या फिर अन्य किसी का स्वरूप धारण करने के बाद पूजा पाठ करते हैं। मर्यादा में रहकर काम करते हैं और कोई भी ऐसा व्यवहार नहीं करते जिससे भक्तों को कष्ट पहुंचे। सदस्यों का कहना था कि जब वे स्वरूप धारण करते हैं तो ऐसा लगता है जैसे भगवान उनके अंदर बस गए हैं।


आधे घंटे में कर लेते हैं स्वरूप धारण
ग्रुप के सदस्य इतने परिपक्व हो चुके हैं कि उन्हें कोई भी स्वरूप धारण करने में 15 से 30 मिनट का समय लगता है। उनके साथ कोई प्रोफेसनल मेकअप आर्टिस्ट नहीं है। देखकर सीखा है और उसकी के अनुसार तैयार हो जाते हैं। सभी सदस्यों के लिए अब यह काम उनके जीवनयापन का जरिया भी बन गया है। वे इसे रोजगार के रूप में अपना चुके हैं। उनका कहना है कि भगवान की भक्ति के साथ कला के प्रदर्शन के लिए बुकिंग के अनुसार हर सदस्य को अच्छी आय प्राप्त हो जाती है। वे कथावाचकों के साथ देश-विदेश जाकर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। युवाओं का कहना है कि जब तक बाबा भोले चाहेंगे वे कला का प्रदर्शन करते रहेंगे।

पहली बार छिंदवाड़ा आने का मौका
युवाओं को पहली बार छिंदवाड़ा आने का मौका मिला है। वे यहां के लोगों से मिलकर उनका प्यार देखकर काफी खुश हैं। युवाओं का कहना था कि हमने केवल छिंदवाड़ा का नाम सुन रखा था, लेकिन कभी आने का मौका नहीं मिला। अब जब भी मौका मिलेगा हम यहां आएंगे।