5 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

catch_icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हर कदम पर अंकल का मिला सहारा, गलत किया तो डांटा, सही किया तो सराहा

मां की ममता व पिता का स्नेह बच्चे के विकास का मुख्य आधार होती है।

2 min read
Google source verification
patrika

हर कदम पर अंकल का मिला सहारा, गलत किया तो डांटा, सही किया तो सराहा

छिंदवाड़ा. मां की ममता व पिता का स्नेह बच्चे के विकास का मुख्य आधार होती है, पर यदि इनमें से एक का भी साया उठ जाए तो बच्चे के पालन-पोषण की राह भी मुश्किल हो जाती है। ऐसे वक्त में अगर कोई अपना आगे बढकऱ बच्चे का हाथ पकड़ ले तो फिर वह बच्चा किस्मतवाला ही होगा। कुछ ऐसा ही हुआ चार फाटक निवासी अंकुर, अंशुल और अनुभव शुक्ला के साथ। कर अधिवक्ता 31 वर्षीय अंशुल जब महज चार साल के थे तो उनके सिर से पिता का साया छिन गया। ऐसे वक्त में अंशुल और उनके दो भाइयों का हाथ उनके चाचा अजय शुक्ला ने थामा। शुक्रवार को अंकल-आंटी डे के अवसर पर अंशुल ने अपनी भावनाएं सांझा की। अंशुल ने बताया कि पिताजी का देहांत वर्ष 1991 में और माताजी का देहांत वर्ष 2011 में हो गया था। अंशुल कहते हैं कि जब पिताजी का देहांत हुआ तो बड़े भाई अंकुर शुक्ला सात वर्ष के थे। मैं चार वर्ष का था और छोटा भाई अनुभव ढाई वर्ष का। अक्सर देखा जाता है कि जिन बच्चों के सिर पर पिता का हाथ नहीं होता वह राह से भटक जाते हैं, लेकिन हमलोग खुशनशीब थे जो ऐसे चाचा हमारे पास थे। चाचा ने हमें कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। हमें जो चाहिए था वह उनसे मिलता रहा। हमने जब गलतियां की तो उन्होंने डांटा जब अच्छा किया तो सराहा। उन्होंने न केवल हमें अच्छी परवरिश दी बल्कि एक अच्छे मुकाम तक भी पहुंचाया। अंशुल कहते हैं कि हम तीनों भाइयों को सफलता के मुकाम पर पहुंचाने के लिए चाचा ने शादी भी नहीं की। उनके त्याग का ही फल है कि हम तीनों भाई अच्छी राह पर हैं। अंशुल कर सलाहकार है और बड़े भाई अंकुर इंजीनियर वहीं छोटे भाई अनुभव साफ्टवेयर इंजीनियर।

घर में ही नहीं समाज में निभा रहे गार्जियन की भूमिका
अंशुल कहते हैं चाचा अजय शुक्ला का व्यक्तित्व और व्यवहार अलग है। वह सादा जीवन व्यतित करते हैं। उन्होंने अपना अब तक का पूरा जीवन समाजसेवा में ही लगाया। परिवार के साथ उन्होंने समाज को भी पूरा समय दिया। यही वजह है कि कई परिवार में वह आज भी वह गार्जियन की भूमिका निभा रहे हैं। अंशुल कहते हैं कि चाचा कई बार गुरैया क्षेत्र में सरपंच भी रहे। आज भी उस क्षेत्र में कोई विवाद होता है तो पहले लोग उन्हीं के पास आते हैं।