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Ban on polythene: दूध की थैली से लेकर हर पैकिंग में दिखता है प्लास्टिक और पॉलीथिन

- हर घर का हिस्सा सिंगल यूज डिस्पोजल का कचरा

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Ban on polythene

दूध की थैली से लेकर हर सामान की पैकिंग में प्लास्टिक-पॉलीथिन हर घर का हिस्सा है। कोई भी सामाजिक गतिविधि ऐसी नहीं होगी, जिसे इस पॉलीथिन के बिना किया जा रहा है। इसके चलते नगर निगम इस बड़े कचरे को पूरी तरह हटा नहीं पा रहा है। प्रतिदिन शहरी कचरा में पांच टन अकेले सिंगल यूज डिस्पोजल है। यहीं स्वच्छता सर्वेक्षण में सबसे बड़ा बाधक बनेगा।
देखा जाए तो शहर में इस समय हर दिन करीब 70 टन कचरा निकलता है। ऐसा कोई घर नहीं होगा, जहां कचरा में इसका 30 फीसदी नहीं होगा। इससे नगर निगम के कचरा संग्रहण में हर दिन शहरी कचरे में मौजूद करीब पांच टन प्लास्टिक को रोकने नगर निगम और प्रशासन के प्रयास रंग नहीं ला पाए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जानकारी के मुताबिक प्लास्टिक से बनी कुछ चीजों पर पहले से ही प्रतिबंध लागू है। इनमें 75 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग, थैलियों के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर रोक शामिल है। इसके अलावा एक जुलाई 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं के निर्माण, आयात, स्टॉक, वितरण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। उसमें प्लास्टिक से बनी वो स्टिक (डंडी) भी शामिल हंै, जो गुब्बारे, ईयर बड, आइसक्रीम, कैंडी में इस्तेमाल होती हैं। प्लास्टिक के कप, गिलास, चम्मच, कांटे, चाकू, स्ट्रॉ और प्लास्टिक या पीवीसी से बने 100 माइक्रोन से कम मोटाई वाले बैनर पर भी रोक लगाई गई है।
प्रतिबंध के बावजूद बाजार में भी सिंगल यूज डिस्पोजल, प्लास्टिक-पॉलीथिन आधारित सामग्री तेजी से बिक रही है। नगर निगम के कर्मचारी ज्यादा दबाव आने पर औपचारिकता वश सीमित कार्रवाई कर देते हैं। ये सिंगल यूज डिस्पोजल व प्लास्टिक सामग्री कहां से आ रही है, इसके स्रोत का पता नहीं लगा पाए हैं। कचरा प्लांट में हर दिन 5 टन कचरा अकेला पॉलीथिन-प्लास्टिक का है। गांवों में भी इसे जहां-तहां पड़े देखा जा सकता है। इसे देखते हुए लग रहा है कि सिंगल प्लास्टिक युक्त कचरा किस तरह आम जिंदगी का अंग बन गया है।

कुछ दिन चले बर्तन, फिर वापस आया सिंगल यूज डिस्पोजल

पांच साल पहले नगर निगम के 48 वार्ड में हर स्व-सहायता समूहों को बर्तन दिए गए थे। उसके बाद ये व्यवस्था साल-दो साल चली। फिर सिंगल यूज डिस्पोजल प्रभावी हो गए। कपड़ों के थैलों की बिक्री से भी पॉलीथिन को हतोत्साहित किया गया। अधिकारियों के जाते ही इसका उपयोग और बढ़ गया है।

नहीं लग पाया सिंगल यूज प्लास्टिक का स्रोत

स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में नगर निगम में कागजों पर शहर के दो बाजारों को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प लिया था। निगम कर्मचारियों ने इस पर छुटपुट कार्रवाई कर प्लास्टिक की जब्ती बनाई थी। उसके बाद इस अभियान को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। निगम अधिकारियों ने सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन के सा्रेत का पता भी नहीं लगाया है। सवाल यह है कि अब कैसे ये बाजार प्लास्टिक मुक्त होंगे।

इनका कहना है
सिंगल यूज प्लास्टिक और मानक स्तर हीन पॉलीथिन और प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के आदेश निगम कर्मचारियों को दिए गए है। इस पर निगम की स्वच्छता टीम को कार्यवाही करनी होगी।
-विक्रम अहके, महापौर