
Big news: किसान की बेटी शिवानी ने रचा इतिहास, दंगल गर्ल के नाम से है मशहूर
छिंदवाड़ा. दंगल गर्ल से मशहूर अंतरराष्ट्रीय पहलवान शिवानी पवार ने पुणे में आयोजित सीनियर राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर स्वर्णित इतिहास रच डाला। शिवानी ने हाल ही में इंदौर में आयोजित राज्य स्तरीय सीनियर कुश्ती प्रतियोगिता में छिंदवाड़ा जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक जीता था और मध्य प्रदेश कुश्ती टीम में अपनी जगह बनाई थी। इस उपलब्धि पर जिला एमेच्योर कुश्ती संघ के सचिव मयूर यादव, अध्यक्ष परासिया विधायक सोहन वाल्मीकि सहित अन्य खेल प्रेमियों ने खुशी जताई। उल्लेखनीय है कि शिवानी छिंदवाड़ा जिले के उमरेठ निवासी किसान नंदलाल पवार की बेटी हैं। तीन बेटियों के पिता ने खेती करते हुए अपनी बेटियों को कुश्ती जैसे कठिन खेल में उतारा और आज उनकी बेटिया विश्व में नाम कमा रही हैं। अगस्त 2023 में नंदलाल की दूसरी बेटी शिवानी पवार ने कनाडा में आयोजित वल्र्ड पुलिस एंड फायर गेम्स में शानदार प्रदर्शन दोहराते हुए भारत के लिए एक गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था। शिवानी देश और मध्यप्रदेश के लिए अब तक कई पदक दिला चुकी हैं, जिनमें 2 स्वर्ण, दो रजत एवं 5 कांस्य पदक शामिल है। वह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में 9 से अधिक बार शामिल होकर मेडल जीत चुकी हैं। शिवानी के जीत का कारवां लगातार जारी है। उनका सपना है कि वे देश के लिए ओलंपिक में स्वर्ण जीते।
बचपन से था फुटबॉल और रनिंग का शौक
उमरेठ के पंडित विशंभर नाथ सरकारी स्कूल में पढ़ी शिवानी पवार को आठवीं कक्षा तक फुटबॉल और रनिंग का शौक था। जब पहली बार में ही शिवानी फुटबॉल के मुकाबले में स्टेट लेवल में चैंपियन बनी तो उसके स्कूली खेल प्रशिक्षक कलशराम मर्सकोले ने उसे कुश्ती खेलने के लिए प्रेरित किया और फिर शिवानी को कलश राम मर्सकोले ने ट्रेनिंग देना भी शुरू किया। उसके बाद शिवानी ने पीछे मुडकऱ नहीं देखा।
बेटियों को बढ़ाया आगे, कहलाती हैं दंगल गर्ल
किसान नंदलाल की तीनों बेटियां भारती पवार, शिवानी पवार और रीतिका पवार ने कुश्ती में कई बार प्रतिनिधित्व कर पदक हासिल किया है। जिससे ये दंगल गर्ल कहलाती हैं। मूलत: किसान परिवार में जन्मी तीनों का कुश्ती से कोई पारिवारिक संबंध नहीं है। शुरुआत के दिनों में तो जब बेटियां कुश्ती खेलने जाती थीं तो लोग नंदलाल परिवार को ताना मारा करते थे कि बेटियों को कुश्ती जैसी खेल में क्यों भेज रहा है, लेकिन समाज के तानों से दूर रहकर उन्हें अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए की जान लगा दी। परिणाम यह है की उमरेठ तहसील की बालिकाओं ने कुश्ती में नया आयाम स्थापित करना शुरू कर दिया।
Published on:
01 Feb 2024 12:43 pm
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