
Big news: शंकराचार्य ने कह दी यह बड़ी बात, बनी रहेगी देश में समस्या, पढ़ें पूरी बखर
छिंदवाड़ा. श्री बड़ी माता मंदिर भूमिपूजन को लेकर छिंदवाड़ा पहुंचे जगत्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने गुरुवार को मीडिया से चर्चा की। कहा कि जब तक भारत की संस्कृति को समझने वाला व्यक्ति देश का नेतृत्व नहीं करेगा तब समस्या बनी रहेगी। उन्होंने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर कहा कि आजकल गोलबंदी वाली राजनीति हो गई है। गोलबंदी का अभिप्राय है ध्रुवीकरण। हमारे सनातन धर्म में सभी व्यक्तियों को एक समान समझा गया है। यदि हिंदू राष्ट्र की बात होगी तो जो व्यक्ति हिंदू नहीं है उसके साथ अन्याय हो जाएगा और यह हमारी मान्यताओं के विपरीत है। इसलिए हमें राम राज्य की बात करनी चाहिए। इसकी विशेषता यह है कि यहां पर सबके साथ न्याय होता है। उन्होंने कहा कि जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज का जन्म छिंदवाड़ा जिले के दिघोरी गांव में हुआ था, जो अब सिवनी जिला हो चुका है। उन्होंने कहा कि गुरुजी को छिंदवाड़ा में ही मुक्तानंद महाराज से पहली दीक्षा मिली थी और यही पर उनका नाम स्वामी स्वरूपानंद पड़ा था। गुरुजी ने बाद में दीक्षाएं ली, लेकिन किसी गुरु ने उनका नाम नहीं बदला। इस इतिहास को सुरक्षित रखना चाहिए। इसलिए यह भव्य कीर्ति स्तंभ बनना चाहिए जिसका पूरे विश्व में नाम हो। उन्होंने कथावाचकों का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हीं की वजह से हमें थोड़ी बहुत धर्म की शिक्षा मिल पा रही है। कहा कि भारत के संविधान में धारा 30 लिख दी गई। हम इसे हटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बहुसंख्यक अपने विद्यालय में बच्चे को धर्म की शिक्षा नहीं दे सकता है जबकि अल्पसंख्यक दे सकता है। हम अपने विद्यालय में बच्चों को आचमन एवं प्राणायाम करना नहीं सीखा सकते, क्योंकि यह धार्मिक शिक्षा के अंतर्गत आ जाएगा जिसको हमारा संविधान रोकता है। कथावाचकों की वजह से ही हमें थोड़ी बहुत धर्म की शिक्षा मिल रही है। कथा ही आज के दौर में हमारी पाठशाला है।
नेताओं में भारतीयता का नहीं है गौरव
उन्होंने कहा कि भारत में जो नेता नेतृत्व करने के लिए आगे आ रहे हैं उनके मन में भारतीयता के प्रति गौरव नहीं है। वह सोचते हैं कि विदेश में जैसे चमाचम माल हैं वैसे हम अपने यहां बना दें। वो परमुख अपेक्षी हो गए हैं। उन्हें यह नहीं पता है कि भारत किस लिए जाना जाता है वो चीजें हम बेहतर करें। भारत की भारतीयता जब निकलकर आएगी तो वो पूरे विश्व में प्रभाव डालेगी। हमने अपनी भाषा छोड़ दी है। ऐसी परिस्थिति में जब हमको अपनी चीजों के प्रति गौरव रहा ही नहीं तो हम अपनी नेता से क्या अपेक्षा करें। जब तक भारत की संस्कृति को समझने वाला व्यक्ति नेतृत्व नहीं करेगा तब तक यह समस्या बनी रहेगी।
दस वर्ष में हर राज्य में खोलेंगे गुरुकुल
शंकराचार्य महाराज ने कहा कि हमारे यहां पहले गुरुकुल थे इसलिए भारत विश्व गुरु था। यहां ज्ञान विज्ञान था। लेकिन अंग्रेजों ने भारत में इंडियन एजुकेशन एक्ट बना दिया। पाश्चात्य शिक्षा को सामने रख दिया। परिणाम यह हुआ कि भारत से भारत की विद्या समाप्त हो गई। अब फिर से गुरुकुल शुरु करने से ही बदलाव होगा। 14 विद्याओं को पढ़ाना शुरु कर दिया जाए तो भारत में फिर से भारतीयता आ सकती है। उन्होंने कहा कि हमारे गुरु ने इस संबंध में बहुत सोचा था। गुरु के आदेश पर हम प्रयासरत हैं। जबलपुर में गुरुकुल खुल चुका है। बनारस में प्रयास चल रहा है। अगले दस वर्ष में हर राज्य में हम गुरुकुल खोलेंगे। जब वहां का पढ़ा हुआ लडक़ा प्रतिस्पर्धा में आगे निकलेगा तब सबकी मानसिकता बदलेगी।
धर्म व्यापार और राजनीति का बन गया विषय
उन्होंने कहा कि धर्म अब जीवन के उन्नयन का विषय नहीं रह गया है। धर्म अब व्यापार का और साथ ही साथ राजनीति का विषय हो गया है।
उन्होंने कहा कि नई राजनीति की भूमिका देश में बन रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2022 तक सभी लोगों को छत देने की घोषणा की बात पर कहा कि अगर उन्होंने 60 प्रतिशत लोगों को दे दिया हो तो वह पास हो जाएंगे।
जोशीमठ में आ रही दरार एवं जमीन धंसने की बात पर कहा कि अंधाधुंध निर्माण, सुरंग वजह है। फिलहाल अभी स्थिति स्थिर है, लेकिन कब तक रहेगी यह कहना मुश्किल है। उन्होंने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि पं. धीरेन्द्र शास्त्री की पगड़ी बहुत सुंदर है। उन्होंने कहा कि अगर वो सबकुछ चमत्कार से ही ठीक कर देते हैं तो अस्पताल क्यों बना रहे हैं। ऐसी जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए कि हम सब ठीक कर देंगे।
Published on:
26 May 2023 12:44 pm
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