
Big news: फिल्म गंगाजल के सुंदर यादव ने कही यह बड़ी बात, पढि़ए पूरा साक्षात्कार
छिंदवाड़ा. हिन्दी फिल्म ‘गंगाजल’ में सुंदर यादव, ‘लगान’ में लखा सहित लगभग एक दर्जन से अधिक फिल्म, धारावाहिक में सशक्त किरदार निभाकर लोगों के दिल में जगह बनाने वाले अभिनेता यशपाल शर्मा मंगलवार को छिंदवाड़ा पहुंचे। उन्होंने पत्रिका से चर्चा की और सभी के सवालों का खुलकर जवाब दिया। दरअसल वे हरियाणवी फिल्म ‘दादा लख्मी’ के प्रमोशन को लेकर छिंदवाड़ा पहुंचे थे। यह फिल्म लोकगायक दादा लख्मीचंद के जीवन पर आधारित है। इस फिल्म का लेखन एवं निर्देेशन भी यशपाल शर्मा ने ही किया है। मंगलवार को शहर के श्रेयांस टॉकीज में फिल्म का प्रदर्शन हुआ। अभिनेता ने पत्रिका से खुलकर बात की। हर सवाल का जवाब दिया। इस दौरान दादा लख्मी फिल्म से जुड़े अनुभवों को सांझा किया। कहा कि यह फिल्म एक लोक कलाकार के जीवन पर आधारित है। उन्होंने बताया कि देश में खिलाड़ी, साहित्यकार के जीवन पर फिल्म बनाई गई, लेकिन अब तक किसी भी लोक कलाकार के जीवन पर फोकस नहीं किया गया।
प्रश्न- फिल्म दादा लख्मी के बारे में बताएं?
उत्तर-हरियाणा के शेक्सपीयर कहे जाने वाले लोक कलाकार दादा लख्मी के जीवन पर यह फिल्म बनाई गई है। इसे मैंने छह साल में बनाई। इसके लिए 17 से ज्यादा किताब पढ़ी। डेढ़ साल कास्टिंग में लग गए। राइटिंग में तीन साल लग गए। बहुत मेहनत के बाद फिल्म तैयार हुई। यह बच्चे, बुजुर्ग सभी को पसंद आ रही है। इसमें डिजिटल नहीं बल्कि वर्जिनल इस्टूमेंट से काम किया गया है। 125 साल पुराने सामानों का इस्तेमाल किया गया है। हरियाणा में यह फिल्म लगातार 100 दिनों तक हाउसफुल चलती रही। अब अन्य प्रदेशों में भी प्रदर्शन कर रहे हैं। इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। मध्यप्रदेश, मुंबई के विश्वविद्यालय में यह फिल्म पाठ्यक्रम में शामिल कर ली गई है।
प्रश्न-लोक कलाकार दादा लख्मी के जीवन से कितना प्रभावित हुए?
उत्तर-उनके जीवन से मैं बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ। छह वर्ष में मैंने छोटे कलाकार एवं अच्छे कटेंट के साथ काम करना सीख लिया है। कामर्शियल फिल्मों से लगाव खत्म हो गया है। उनके जीवन ने ऐसा प्रभावित किया कि मैंने बड़े कलाकार के साथ काम करने का लालच छोड़ दिया।
इस फिल्म को बनाने में डूबा रहा। इस कैरेक्टर को पढ़ते-पढ़ते मेरी आदत भी उन्हीं के जैसे हो गई।
प्रश्न-आपको सबसे ज्यादा संतुष्टी कहां काम करने में मिलती है?
उत्तर-थियेटर जैसी फिल्म करने में सबसे ज्यादा संतुष्टि मिलती है। मेरा मानना है कि स्कूलों में कक्षा दूसरी से थिएटर की क्लास लगनी चाहिए। इससे विद्यार्थियों में समभाव, टीम वर्क की भावना, आत्मविश्वास बढ़ेगा। इसके अलावा कई ऐसी चीजें मिलेंगी जो उसके जीवन में काम आएगी। असली पढ़ाई यही है, जिंदगी की पढ़ाई यही है। हालांकि सिनेमा की ताकत अलग है। कम समय में सबसे ज्यादा एक्सप्लोर करने की चीज है सिनेमा।
प्रश्न-अच्छी मूवी के लिए सबसे ज्यादा क्या जरूरी है?
उत्तर-मैं समय-समय पर बड़े कलाकारों एवं निर्देशकों के साथ फिल्म कर लेता हूं, लेकिन मैं सच बताऊं तो मुझे थिएटर की जैसी फिल्में करने में मजा आता है। पैसा से नहीं पैशन से अच्छा सिनेमा मिलता है।
प्रश्न-आपके अच्छे कलाकार होने में थिएटर ने कितना प्रभाव डाला है?
उत्तर-मुझे लगता है कि अभिनय गार्ड गिफ्टेड होती है। कौवे से कोयल की बोली नहीं बुलवा सकते हैं। थिएटर का भी मेरे जीवन में बड़ा योगदान है।
इंडस्ट्री में थिएटर के लोग ही आज छाए हुए हैं। अब स्टार के साथ नहीं एक आर्टिस्ट के साथ ही काम करना चाह रहे हैं।
प्रश्न-उभरते कलाकारों को क्या संदेश देंगे?
उत्तर-समय बदल रहा है। थिएटर आर्टिस्ट की मांग हो रही है। रंगमंच से उभरे कलाकार आज हर जगह छाए हुए हैं। मैं बस यही कहूंगा कि मेहनत करें और शॉर्टकट न अपनाएं, दिखावा न करें। अच्छी एक्टिंग की नहीं जाती, हो जाती है।
प्रश्न-एक कलाकार के लिए किताब पढऩा कितना महत्वपूर्ण है?
उत्तर-बहुत ज्यादा। साहित्य हर किसी को पढऩी चाहिए। स्क्रिप्ट में हम बहुत अधिक नहीं समझ सकते। जीवंत अभिनय के लिए किताब पढऩा बहुत जरूरी है।
प्रश्न-बॉलीबुड में राजनीति, वंशवाद, गुटबाजी को कैसे देखते हैं?
उत्तर-मंै न आमिर खान, प्रकाश झा और न ही किसी गुट में हूूं। मैं सभी जगह काम करता हूं। एक बाप अपने बेटे को आगे बढ़ाना चाहता है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। हां यह जरूर है कि किसी कलाकार को गिराकर नहीं करना चाहिए। अगर उसमें दम होगा तभी तो आगे बढ़ेगा।
Published on:
26 Jul 2023 02:54 pm
बड़ी खबरें
View Allछिंदवाड़ा
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
