
नागपुर में इलाज कराने गए अथर्व के लिए आई खुशी की घड़ी, टॉपर बनने के बाद क्या कहा, पढ़ें पूरी खबर
छिंदवाड़ा. डॉ. एपीजे अब्दूल कलाम हमेशा कुछ नया करने की सोचते थे। उन्होंने वैज्ञानिक बनने की उस समय सोची जब साइंस की शुरुआत हुई थी। मुझे उनकी यही खासियत भा गई। मैं उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानता हूं। यह कहना है छात्र अथर्व डबली की। जो सीबीएसइ 10वीं परीक्षा में 98.2 प्रतिशत अंक लाते हुए जिले के टॉपर लिस्ट में शामिल हुए। हालांकि रिजल्ट जब घोषित हुआ तो उस समय अथर्व नागपुर में अपना इलाज कराने गए हुए थे। रिजल्ट का पता चलते ही उनके खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह पैरेट्स के साथ देर शाम छिंदवाड़ा लौटे। विवेकानंद कॉलोनी निवासी अथर्व के पिता प्रवीण डबली शासकीय स्कूल में एचएम हैं। माता प्रणिता डबली गृहिणी। अथर्व कहते हैं कि पढ़ाई के लिए पैरेंट्स ने कभी दबाव नहीं डाला। बस यही कहते थे कि हमेशा अच्छा करने का प्रयास करो। अथर्व कहते हैं कि सफलता को कोई शार्टकट नहीं होता। बस यही है कि एक लक्ष्य बनाकर पढ़ाई करते रहना चाहिए। मैंने पढ़ाई के साथ-साथ माइंड फ्रेस करने के लिए खेल एवं अन्य गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। अथर्व फिजिक्स रिसर्च फील्ड में जाना चाहते हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय पैरेट्स एवं शिक्षकों को दिया।
एक ही मंत्र पढ़ाई और सिर्फ पढ़ाई
पैरेंट्स ने कभी मुझ पर पढ़ाई का दबाव नहीं बनाया। बस वह यही कहते थे कि टेंशन लेकर पढ़ाई मत करो केवल यही सोचो की तुम्हें बेस्ट देना है। यह कहना है कि सीबीएसई १०वीं परीक्षा में 96.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिले की टॉपर लिस्ट के शामिल श्रुति दुबे का। निर्मल पब्लिक स्कूल की छात्रा श्रुति कहती हैं कि पैरेंट्स एवं शिक्षकों का हमेशा साथ मिला। मैं पढ़ाई के दौरान हमेशा मोबाइल, टीवी से दूर रही। केवल पढ़ाई पर ही ध्यान नहीं दिया।फिजिकल एक्टिविटी में भी भाग लेती रही। उन्होंने बताया कि मुझे जो स्कूल में पढ़ाया जाता था उसका रिवीजन घर आकर करती थी। इसके अलावा सेल्फ स्टडी भी मेरी सफलता में कारगर साबित हुई। श्रुति के पिता विवेक व्यापारी हैं माता नेहा गृहिणी हैं। श्रुति डॉक्टर बनना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर लोगों को नया जीवन देते हैं। श्रुति कहती हैं कि मैंने अपना बेस्ट दिया है। इसके पीछे केवल यही कारण है कि मेरा मूलमंत्र था पढ़ाई-पढ़ाई और सिर्फ पढ़ाई।
कभी ट्यूशन नहीं गया, बनूंगा इंजीनियर
सफलता पाने के लिए जरूरी है कि आप अपने काम को पूरी ईमानदारी से करें। यह कहना है कि सीबीएसइ 10वीं परीक्षा में 98 प्रतिशत अंक लाकर जिले के टॉपर लिस्ट में शामिल हुए कनिष्क उपाध्याय का। दिल्ली पब्लिक स्कूल के छात्र कनिष्क कहते हैं कि सफलता पाने के लिए उन्होंने शुरू से ही पढ़ाई की। कभी ट्यूशन नहीं गया। स्कूल में जो पढ़ाया जाता उसे घर आकर रिवीजन करता इसके अलावा इंटरनेट से भी काफी मदद मिली। कनिष्क के पिता संजय उपाध्याय शिक्षक हैं और माता रक्षा स्कूल संचालिका हैं। कनिष्क को साफ्टवेयर इंजीनियर बनना है। वे कहते हैं कि मैंने कभी पढ़ाई में समय की पाबंदी नहीं लगाई। बस चैप्टर या फिर टापिक वाइज पढ़ता था। पैरेंट्स ने भी कभी मुझे अच्छे नंबर लाने के लिए नहीं कहा। बस वह यही कहते थे कि अच्छे से पढ़ाई करो परिणाम की चिंता मत करो। कनिष्क ने 10वीं के विद्यार्थियों के लिए संदेश भी दिया कहा कि एनसीइआरटी की किताबों पर ध्यान देना चाहिए। कनिष्क ने अपनी सफलता का श्रेय पैरेंट्स व शिक्षकों को दिया।
Published on:
30 May 2018 12:08 pm
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