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अतिवृष्टि से इस जमीन की फसल क्षतिग्रस्त, प्रशासन से गुहार लगा रहे किसान

सौंसर, पांढुर्ना, बिछुआ, मोहखेड़ और छिंदवाड़ा के गांवों में मक्का, कपास और सोयाबीन का सर्वेक्षण करने की मांग कर रहे किसान

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छिंदवाड़ा. जुलाई माह में हुई अतिवृष्टि से भारी जमीन पर लगी मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा है। उनके पौधों की बढ़वार नहीं हो पा रही है। इधर, हल्की जमीन वाले किसान मौसम खुलते ही निदाई, गुड़ाई और यूरिया से डैमेज कंट्रोल में लग गए हैं।
खरीफ सीजन में जिले में करीब 4 लाख हैक्टेयर में मक्का, सोयाबीन, कपास समेत अन्य फसलें लगी हुई है। इनमें सबसे अधिक 2.50 लाख हैक्टेयर में मक्का है। जुलाई माह में सौंसर, पांढुर्ना, बिछुआ, मोहखेड़ और छिंदवाड़ा के अधिकांश गांवों में भारी जमीन वाले इलाकों के खेतों में पानी भर गया और फसल पीली पड़ गई। अब मौसम खुलने पर भी पौधों की बढ़वार नहीं हो पा रही है। इधर, जहां हल्की जमीन से पानी बह गया। उन इलाकों के किसान खेतों में यूरिया से फसल बचाने में जुटे हैं। किसानों का कहना है कि क्षतिग्रस्त फसलों का सर्वेक्षण के तुरंत आदेश होना चाहिए। इससे वास्तविक स्थिति आ जाएगी। किसान संघ के नेता गांव-गांव से फसल नुकसानी की जानकारी एकत्र कर रहे हैं। इस पर प्रशासन का ध्यान भी आकर्षित किया गया है। सौंसर, पांढुर्ना और मोहखेड़ के किसान इस पर ज्ञापन दे चुके हैं। अब जिला स्तर पर इसकी तैयारी की जा रही है।
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इनका कहना है...
अतिवृष्टि से जिले में किसानों की करीब 60 प्रतिशत से अधिक फसल को नुकसान पहुंचा है। शासन ने इसके सर्वे के निर्देश भी नहीं दिए। वास्तविक स्थिति खेतों में ही जाकर देखी जा सकती है। उत्पादन पर इसका असर पड़ेगा।
-पुष्पेन्द्र चौधरी, अध्यक्ष भारत कृषक समाज।
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अतिवृष्टि से मक्का समेत अन्य फसलें छह-छह इंच में आक र रूक गई है। बढ़वार न आने से किसान चिंतित है। भारी जमीन की फसलें ज्यादा नुकसान में हैं। किसान संघ जल्द सर्वेक्षण की मांग कर रहा है।
-रामराव लाडे, महामंत्री, भारतीय किसान संघ
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अतिवृष्टि से भारी जमीन खरीफ फसलों में कुछ नुकसान की जानकारी आ रही है। अधिकांश स्थलों पर मौसम खुलते ही फसलों की स्थिति में सुधार हो रहा है। यूरिया की मांग बढऩे पर रेलवे रैक से खाद आ रही है।
-जितेन्द्र कुमार सिंह, उपसंचालक कृषि।
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इस मौसम में किसानों को ये उपाय करना जरूरी
1.मक्का की 25 दिन की खड़ी फसल में पर्याप्त नमी सुनिश्चित करने के बाद नाइट्रोजन धारी उर्वरकों के उपयोग की जरूरत।
2.मक्का फसल में फाल आर्मी वर्म कीट की रोकथाम की आवश्यकता।
3.सोयाबीन की फसल में इल्लियों की रोकथाम के लिए दवाओं के छिड़काव करें किसान।
4. कपास की खड़ी फसल में निंदाई, गुड़ाई एवं मिट्टी चढ़ाने की आवश्यकता।
5.90, 120 एवं 150 दिनों पर गन्ने की फसल में निंदाई-गुड़ाई कर बची हुई नत्रजन खाद की मात्रा देने के पश्चात् मिट्टी चढ़ाना जरूरी।
-डॉ.विजय पराडकर, सहसंचालक उद्यानिकी कॉलेज।