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नगर निगम में बाहर ठेके दार और अंदर कर्मचारियों में असंतोष

बजट संकट...निर्माण कार्यो के लाखों रुपए के बिलों से लेकर तनख्वाह भुगतान की चुनौती

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नगर निगम में बाहर ठेके दार और अंदर कर्मचारियों में असंतोष

नगर निगम में बाहर ठेके दार और अंदर कर्मचारियों में असंतोष

छिंदवाड़ा.नगर निगम कार्यालय के बाहर इस समय लाखों रुपए के लंबित बिलों का भुगतान पाने वाले ठेकेदारों का जमावड़ा है तो अंदर कर्मचारियों के मन में वेतन के असंतोष की चिंगारी सुलग रही है। इसके साथ ट्रैक्टरों-सफाई वाहनों में डीजल, स्ट्रीट लाइट के बिजली भुगतान के बेहिसाब खर्च अलग है। इनसे निपटने निगम अधिकारियों को पसीना छूट रहा है।
विधानसभा चुनाव के बाद नगर निगम में इस समय गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हुआ है। हालत यह है कि निगम के लेखा कार्यालय मेें दिन भर सत्ता हो या फिर विपक्ष से जुड़े ठेकेदारों की भीड़ लगी रहती है। किसी की जुबां से जैसे ही किसी के भुगतान की खबर उड़ी, वैसे ही ठेकेदार अपने पुराने लंबित बिलों का भुगतान पाने दौड़ पड़ते हैं। फिर वित्तीय स्थिति बताए जाने पर उन्हें वापस लौटना पड़ता है। लम्बे समय से भुगतान न होने से ठेकेदारों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
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अध्यक्ष के पास पहुंचे ठेकेदार,पार्षदों की बैठक जल्द
कुछ ठेकेदारों ने निगम अध्यक्ष धर्मेन्द्र सोनू मागो के पास पहुंचकर निगम में भुगतान न होने की शिकायत की। उन्होंने कहा कि वार्डो में निर्माण कार्य करा लिए गए हैं लेकिन अधिकारी भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। इससे उनके समक्ष भी आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। इससे सत्ता और विपक्ष से जुड़े दोनों ठेकेदार तंग है। कर्मचारियों का वेतन अलग बकाया है। अध्यक्ष ने कहा कि इस मुद्दे पर जल्द कांग्रेस पार्षदों की बैठक हो सकती है। फिर एक राय होकर आयुक्त से बातचीत की जाएगी।
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अक्टूबर के वेतन में २० लाख बकाया, नवम्बर की शेष
नगर निगम के १९०० कर्मचारियों को अक्टूबर माह की तीन करोड़ रुपए से अधिक की तनख्वाह दी जा चुकी है। इस माह के केवल २० लाख रुपए का वेतन भुगतान शेष रह गया है। नवम्बर की पूरी तनख्वाह बकाया है। जानकारी के अनुसार चुंगी क्षतिपूर्ति के नाम पर नगर निगम को नवम्बर में ५४ लाख और दिसम्बर मेें ७४ लाख रुपए प्राप्त हुए। वेतन भुगतान में शेष राशि निगम को स्थानीय टैक्स से मिलानी पड़ी। कर्मचारियों में वेतन भुगतान को लेकर असंतोष बना हुआ है। जनवरी में फिर दो माह की तनख्वाह बकाया हो जाएगी।
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इनका कहना है...
नगर निगम में वित्तीय संकट बना हुआ है। हमारी पहली प्राथमिकता कर्मचारियों की तनख्वाह, सफाई वाहनों के डीजल बिल तथा स्ट्रीट लाइट व जल संयंत्रों के बिजली बिल है। इसके बाद शेष बचे संसाधनों से ठेकेदारों के लंबित भुगतान किए जाएंगे।
-राहुल सिंह, आयुक्त नगर निगम।
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