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Education: विश्वविद्यालय में उत्तरपुस्तिका रखने की जगह नहीं, छह माह का ही है नियम

जल्द ही परीक्षा शुरु होंगी और उत्तरपुस्तिकाओं को विश्वविद्यालय लाया जाएगा।

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छिंदवाड़ा. राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय में जगह की कमी की वजह से आने वाले समय में उत्तरपुस्तिकाओं को रखने की समस्या हो सकती है। वर्तमान में विश्वविद्यालय आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। जल्द ही परीक्षा शुरु होंगी और उत्तरपुस्तिकाओं को विश्वविद्यालय लाया जाएगा। हालांकि जगह की कमी की वजह से समस्या होगी। वर्तमान में विश्वविद्यालय में उत्तरपुस्तिकाओं का ढेर लगा हुआ है, जबकि विश्वविद्यालय अध्यादेश के अनुसार अधिकतम छह माह तक की उत्तरपुस्तिकाएं रखी जा सकती हैं। इसके बाद विश्वविद्यालय टेंडर प्रक्रिया से उत्तरपुस्तिकाओं को कुछ शर्तों के साथ सेल कर सकता है। बता दें कि परीक्षा संपन्न होने के बाद उत्तरपुस्तिका विश्वविद्यालय लाई जाती है और फिर इसका मूल्यांकन कराया जाता है। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद रिजल्ट से असंतुष्ट विद्यार्थी पूर्नमूल्यांकन या पूर्नगणना की प्रक्रिया अपनाते हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय में कम से कम छह माह तक उत्तरपुस्तिका संभाल कर रखी जाती है। इसके बाद व्यापारी के माध्यम से उत्तरपुस्तिका को सेल कर नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि आरटीआई की वजह से अब सप्लीमेंट्री के अंतिम रिजल्ट तक कुछ विश्वविद्यालय उत्तरपुस्तिका सहेज कर रखते हैं, लेकिन नियम में यह बाध्यता नहीं है।

अब टेंडर प्रक्रिया की शुरु
विश्वविद्यालय ने उत्तरपुस्तिकाओं को सेलआउट करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरु की है। हालांकि पूरी प्रक्रिया संपन्न होने में लगभग दो माह लगेंगे। ऐसे में विश्वविद्यालय में व्यवस्थाएं बिगड़ेगी। बता दें कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में अधिकारियों के बैठने के लिए भी प्रर्याप्त चैम्बर नहीं है।

वर्ष 2019 से हो रहा संचालित
विश्वविद्यालय की स्थापना अगस्त 2019 में हुई थी। तब से लेकर अब तक उत्तरपुस्तिकाओं को नष्ट करने के लिए कोई टेंडर प्रक्रिया नहीं हुई। ऐसे में विश्वविद्यालय में लगभग तीन साल की उत्तरपुस्तिका जमा हो गई है। अब जबकि जल्द ही परीक्षाएं होनी है तो विश्वविद्यालय नींद से जगा है और टेंडर प्रक्रिया शुरु हो गई है। अगर विश्वविद्यालय ने इस पर पहले ही ध्यान दिया होता तो यह समस्या नहीं आती।

इनका कहना है...
नियम के अनुसार छह माह के बाद उत्तरपुस्तिकाओं को नष्ट करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। वर्तमान में थोड़ी समस्या तो है, लेकिन व्यवस्था बन जाएगी। पहले टेंडर क्यों नहीं हुआ, इस बारे में मुझे नहीं पता। अब टेंडर प्रक्रिया की जा रही है।
मेघराज निनामा, कुलसचिव, आरएसएस विवि, छिंदवाड़ा