
मक्का किसान मायूस
प्रभाशंकर गिरी
छिंदवाड़ा। मक्का छिंदवाड़ा तो, धान बालाघाट जिले की पहचान है। इनके रिकॉर्ड उत्पादन की वजह से ही इन दोनों जिलों को जाना जाता है, लेकिन इस बार इन दोनों पर संकट छाया हुआ है। अतिवृष्टि की वजह से जहां छिंदवाड़ा और सिवनी जिले में मक्का का उत्पादन प्रभावित होने की आंशका है, वहीं धान पर मौसमी मार के साथ बैक्टीरिया और वायरस का साया है। कृषि जानकारों की मानें तो इन दोनों प्रमुख फसलों का उत्पादन इस वर्ष प्रभावित होगा।
रिकॉर्ड बारिश
इस बार तीनों ही जिलों में रिकॉर्ड बारिश हुई है। छिंदवाड़ा में तो इतनी ज्यादा बारिश हुई कि किसानों के खेतों पर डाला गया 27 हजार मीट्रिक टन से अधिक यूरिया पानी में बह गया। वहीं जिले के 258 ग्रामों में 998.454 हैक्टेयर जमीन पर लगी मक्का, कपास समेत अन्य फसलों को नुकसान हुआ है। बाजार और जानकारों के आकलन की माने तो करीब 25-30 फीसद तक मक्का का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, क्योंकि इस बार फसल को सही बढ़त नहीं मिल पाई है। जिले में मक्का का प्रति हैक्टेयर औसत उत्पादन 44 क्विंटल है। इस बार सर्वाधिक वर्षा वाले इलाकों में यह उत्पादन 25 क्विंटल तक गिर सकता है।
धान पर मकड़ी का साया
बालाघाट जिले में बीते कुछ वर्षों से वायरस, बैक्टीरिया के साथ पेनिकल माइट कीट धान को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। लगातार बारिश और बादल छाए रहने से ये ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। इस वर्ष यही हुआ है। पेनिकल माइट एक मकड़ी है ,जो सामान्य आंखों से नजर नहीं आती। जिले में करीब चार वर्ष पहले इसकी मौजूदगी दर्ज की गई थी। इससे प्रति एकड़ दो-पांच क्विंटल तक उत्पादन पर असर पड़ता है। इधर, बारिश और उमस के कारण मध्यम से लेट किस्मों में भूरा माहो, तनाछेदक, पेनिकल माइट कीट के साथ नेक ब्लास्ट, लाई फूटना, पेनिकल ब्लाइट, तना गलन जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ गई है।
क्या रहेगा बाजार का रुख
भले ही पिछले दिनों जारी मंडी कैलेंडर में मक्का जैसी उपज के दामों में गिरावट की सम्भावना जताई गई हो, लेकिन स्थिति पर गौर किया जाए तो बाजार में मांग के अनुरूप कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। अनाज व्यापारी संघ के अध्यक्ष प्रतीक शुक्ला का कहना है कि अतिवृष्टि से करीब 30 फीसद उपज के नुकसान होने की आशंका है। शुरुआत में मांग स्थिर होने से कीमतें भी स्थिर रहेंगी। बाद में मांग के बढऩे पर कीमतों में भी उछाल आएगा।
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खरीफ सीजन में रकबा
- छिंदवाड़ा जिले में तीन लाख हैक्टेयर में मक्का, 52 हजार हैक्टेयर में कपास और 28 हजार हैक्टेयर में सोयाबीन की फसल ली गई है।
-बालाघाट जिले में करीब 2 लाख 85 हजार हैक्टेयर रकबा है। इसमें करीब 90 फीसद रकबा धान का है। शेष 10 फीसद में अन्य फसलों का रकबा शामिल है।
- सिवनी जिले में भी धान का रकबा दो लाख हैक्टेयर से ज्यादा है।
इनका कहना है
पूरे बालाघाट जिले में पेनिकल माइट के मामले देखने को मिल रहे हैं। सिवनी जिले के बरघाट क्षेत्र में भी इसका असर है। इसके अलावा धान की फसल पर अन्य वायरस और बैक्टीरिया का भी प्रकोप रहता है। जहां भी शिकायत मिलती है ,किसानों को सलाह दी जाती है।
डॉ. आरएल राउत, कृषि वैज्ञानिक, बालाघाट
Updated on:
10 Oct 2022, 11:01 AM IST
Published on:
10 Oct 2022, 11:01 AM IST
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