
Excess rain: Maize production will be affected
छिंदवाड़ा। जुलाई-अगस्त माह में अतिवृष्टि से मक्का का उत्पादन 40 फीसदी प्रभावित रहने की आशंका व्यक्त की जा रही है। किसान भारी जमीन वाले खेतों में जलभराव से इस मैदानी हकीकत को बयां कर रहे हैं। इधर, मण्डी के व्यापारी इस पर बाजार में भाव तेज होने का अनुमान जता रहे हैं।
इस साल खरीफ सीजन में किसानों ने तीन लाख हैक्टेयर में मक्का, 52 हजार हैक्टेयर पर कपास और 28 हजार हैक्टेयर पर सोयाबीन की फसल की बोवनी की है। अतिवृष्टि से सौंसर, चांद, चौरई, छिंदवाड़ा, मोहखेड़, बिछुआ के ज्यादातर गांवों में फसल अपेक्षाकृत नहीं बढ़ पाई है। सितम्बर में ही मौसम खुलने पर किसानों को फसल बढ़वार का समय मिल पाया। इससे फसल में अक्टूबर तक कुछ बढ़त आ सकती है। किसानों की सबसे बड़ी चिंता मक्का फसल की है। मक्का की प्रति हैक्टेयर औसत उत्पादन 44 क्विंटल है। इस बार सर्वाधिक वर्षा वाले इलाकों में यह उत्पादन 25 क्विंटल या फिर इससे कम रह सकता है।
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष मेरसिंह चौधरी का कहना है कि अतिवृष्टि से मक्का समेत अन्य फसलों का औसत उत्पादन 40 प्रतिशत तक प्रभावित होगा। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा। बाजार में यदि 2500-3000 रुपए क्विंटल का भाव खुलेगा तो ही किसान फसल क्षति की रिकवरी कर सकता है। फिलहाल उसे राज्य शासन से फसल सर्वेक्षण के आधार पर मुआवजा की आस है। इस पर किसान संघ कई बार प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर चुका है।
मंडी व्यापारी की नजर
कृषि उपज मण्डी कुसमैली के व्यापारियों की मानें तो पिछले बार मक्का का भाव 1500 रुपए प्रति क्विंटल पर खुला था। इसके बाद यह भाव 2600 रुपए क्विंटल तक गए थे। इस बार मक्का फसल अक्टूबर अंत तक बाजार में आने की उम्मीद की जा रही है। इस बार उत्पादन कम आया, तो बाजार की प्रतिस्पर्धा और मांग के बढऩे पर किसानों को शुरुआत में ही 2000 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जा सकता है। आगे यह बाजार की मांग पर निर्भर करेगा। अनाज व्यापारी संघ के अध्यक्ष प्रतीक शुक्ला का कहना है कि मक्का की फसल के 25 प्रतिशत प्रभावित होने की आशंका है। इससे बाजार भाव में तेजी आएगी।
Published on:
12 Sept 2022 11:33 am
