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Freedom fighter: आजादी की अलख जगाने वाले ‘जनसेवक’ का निधन, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

100 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रूपचंद्र राय थे बीमार

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Bad news: आजादी की अलख जगाने वाले ‘जनसेवक’ का निधन, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

Bad news: आजादी की अलख जगाने वाले ‘जनसेवक’ का निधन, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

छिंदवाड़ा. 100 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रूपचंद्र राय बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। अंतिम विदाई देने लोगों का हुजूम उमड़ा। वे काफी दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और अस्पताल में भर्ती थे। बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ पातालेश्वर मोक्ष धाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पूर्व शहीद स्मारक पर उनका पार्थिव शरीर आमजन के दर्शनार्थ रखा गया था, जहां पर कलेक्टर मनोज पुष्प एवं पुलिस अधीक्षक विनायक वर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए एवं पुलिस बल की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। शोक शस्त्र एवं शोक फायर किया गया। पाटनी चौक निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रूपचंद राय हमेशा लोगों से जुड़े रहे और हित में काम करते रहे। इसी वजह से उन्हें जनसेवक भी कहा जाता था। देश को आजाद कराने के लिए उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लिया और जेल भी गए। सन 1923 में छिंदवाड़ा के पाटनी चौक निवासी नत्थू लाल राय और सीताबाई राय के यहां जन्म लिए रूपचंद्र राय ने जनसेवा को ही अपना कर्तव्य पथ माना। वे गांधी जी के असहयोग आन्दोलन से प्रेरित हुए और अंग्रेजो का खुलकर विरोध किया। बचपन में उन्होंने स्कूल में अंग्रेजों का झंडा उतार कर तिरंगा झंडा फहराकर देशभक्ति की एक झलक दिखलाई। तिरंगा झंडा फहराने के आरोप में उन्हें छिंदवाड़ा के मथुरा प्रसाद स्कूल से निकाल दिया गया। तब से वह निरंतर अंग्रेजों के विरुद्ध में चल रहे आंदोलन में शामिल होते रहे। जबलपुर में धरणीधर बाजपेई, बाबूराव परांजपे के नेतृत्व में उन्होंने लगातार आजादी के आंदोलन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्हें अंग्रेजों द्वारा छिंदवाड़ा से जिला बदर भी किया गया और अनेकों बार जेल में भी भेजा गया, लेकिन उनका अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन वरिष्ठ नेताओं के संरक्षण में आजादी के मिलने तक जारी रहा।

राजनीति में रहे सक्रिय
आजादी के बाद भी वह तत्कालीन राजनीति में सक्रिय रहे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के द्वारा गठित जनसंघ में एक कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए उन्होंने छिंदवाड़ा एवं आसपास में जनसंघ को आम जनता के बीच ले जाने का काम किया। सन 1958 से लेकर 1962 तक वह नगर परिषद छिंदवाड़ा के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहे। एक चुने हुए जनप्रतिनिधि के दायित्व को वे भली-भांति समझते थे। तब उन्होंने छिंदवाड़ा के लिए पेयजल की व्यवस्था की भरता देव स्थित कुल बेहरा नदी पर बांध बनाकर फिल्टर प्लांट लगवाया और छिंदवाड़ा में वर्तमान सब्जी मंडी में स्थित शहर की सबसे बड़ी पानी टंकी का निर्माण कराया एवं छिंदवाड़ा में हर घर में नल से जल पहुंचने का ऐतिहासिक काम किया

झाड़ू लेकर करने लगे सफाई
बताया जाता है की स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रूपचंद राय ने एक बार नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों के हड़ताल करने पर स्वयं झाड़ू लेकर पूरे शहर में सफाई अभियान चलाया। उन्होंने कई स्कूल की स्थापना भी की। उनका लक्ष्य था बच्चे पढ़ लिख कर आदर्श नागरिक बने। वे स्वयं हॉकी के अच्छे खिलाड़ी थे और छिंदवाड़ा की ओर से उन्होंने अनेकों मैचों में प्रतियोगिताओं में भाग लिया। कुश्ती से भी उनका एक अलग लगाव रहा। उसके लिए उन्होंने छोटी माता मंदिर में अखाड़े की भी स्थापना की थी।

बंदी बनाकर भेजा जेल
वर्ष 1975 में जब देश में आपातकाल लगाया गया तब उन्हें मीसा बंदी बनाकर जेल में डाला दिया। उनके साथ बंदी के रूप में बाबूलाल गौर, बाबूराव, कैलाश जोशी भी जेल में बंद रहे थे। वर्ष 1977 में जेल से बाहर आए। अटल बिहारी वाजपेई जी के साथ मुलाकात कर उन्हें छिंदवाड़ा आने का भी निमंत्रण दिया। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेई जब छिंदवाड़ा प्रवास पर आए तो विशेष रूप से वे रूपचंद राय के घर पहुंचे।

समस्याओं को लेकर बैठ जाते थे धरने पर
जनसमस्याओं को लेकर वे अक्सर धरने पर बैठ जाते थे। उनकी हठधर्मिता ऐसी थी कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी बात माननी पड़ती थी। वे तब तक धरने पर बैठे रहते थे जब तक कार्यवाही नहीं हो जाती थी। इसी वजह से लोगों ने उनका नाम जनसेवक रखा था।