
छिंदवाड़ा. जिले के पहाड़ी और आदिवासी बाहुल क्षेत्र जुन्नारदेव एवं तामिया के 138 गांवों में नल-जल योजना पहुंचेगी। इसके लिए शासन ने 5929.04 लाख के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इससे ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में निवासरत बड़ी आबादी को जलसंकट से मुक्ति मिलेगी। यह गांव सालों से शुद्ध पेयजल की समस्या से जूझ रहे थे। उनके घर-घर तक पेयजल पहुंचाने का काम जल्द ही शुरु होगा। बता दें कि इन क्षेत्रों की 100 पंचायतों में मुख्यालय स्तर पर तो नल-जल योजनाओं का लाभ निवासियों को मिला, लेकिन इनसे जुड़े गांव, सुविधा से वंचित थे। पीएचई मंत्रालय की स्थायी वित्त समिति से तामिया और जुन्नारदेव विकासखण्ड के लिए नई योजनाओं की प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है। अब इस संबंध में जल्द ही निविदा की प्रक्रिया शुरू होगी और काम शुरू किया जाएगा। तामिया विकासखण्ड की 22 पंचातयों के 49 ग्रामों के लिए 1776.39 लाख और जुन्नारदेव विकाखण्ड की 51 पंचायतों के 89 गांवों के लिए 4152.65 लाख मंजूर किए गए हैं।
कमलनाथ सरकार ने बनाई थी योजना
वर्ष 2018 में प्रदेश में कमलनाथ सरकार ने जलसंकट से जूझ रहे जिले के ऐसे आदिवासी बहुल क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रित किया।हर घर जल की वृहद योजना तैयार की गई। जुन्नारदेव विधानसभा में लोगों को सालों से जल संकट का सामना करना पड़ रहा था। इसे ध्यान में रखते हुए जुन्नारदेव विधायक सुनील उइके ने अपने क्षेत्र में सबसे पहले ऐसी ही पंचातयों के गांवों का सर्वे कर सूची बनाई और उसे सरकार के समक्ष रखा। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ और सांसद नकुलनाथ के विशेष प्रयासों से जुन्नारदेव और तामिया विधानसभा के गांवों का चयन कर योजना विभाग के माध्यम से प्रस्तुत की गई थी। कांग्रेस सरकार के समय ही इसके डीपीआर भी तैयार कर दिए गए थे। जल जीवन मिशन के तहत अब पहाड़ी और सुदूर अंचलों में बसे इन गांवों के लोगों को पानी की सुलभता जल्द ही मिलेगी।
क्षेत्र में विकराल है पानी की समस्या
जुन्नारदेव विधानसभा के ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां पानी की गंभीर समस्या है। नल-जल योजनाएं ज्यादातर पंचायत मुख्यालयों तक ही सीमित रही हैं, लेकिन बड़े ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी बारहों महीने जलसंकट से जूझती रही है। लोग हैंडपंप, कुंआ, बावड़ी एवं नदी नालों से पानी लाने मजबूर है। कई जगहों पर तो कावड़ों से भी पानी लाना पड़ता है। गर्मी के दिनों में हालात और भी गंभीर हो जाती है। पेयजल संकट के साथ सिंचाई की भी भारी समस्या है। क्षेत्र को पेयजल की समस्या से निजात मिलती है तो यहां की जमीनों को भी सिंचित बनाने के प्रयासों को बल मिलेगा। यहां ज्यादातर लोग खेती किसानी से जुड़े हैं इसलिए जल सुविधा होने पर उनकी आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी। विधायक सुनील उइके ने बताया कि जलसंकट के कारण ही क्षेत्र में कोई बड़ा उद्योग नहीं लग पाया है। यह इस क्षेत्र की विडंबना है। कृषि आधारित यहां के जीवन के लिए पानी की उपलब्धता बेहद जरूरी है।
पूर्व में भी मिल चुकी है स्वीकृति
विधानसभा के अंतर्गत 3700.32 लाख की पूर्व में भी स्वीकृत हो चुकी है। जुन्नारदेव विकासखण्ड की 46 ग्राम पंचायतों के 71 ग्रामों में 2901.61 लाख एवं तामिया विकासखण्ड की 19 ग्राम पंचायतों के 23 ग्रामों में 798.71 लाख की नलजल योजनाएं स्वीकृत हो चुकी थी, जिनका कार्य कई ग्राम में पूर्ण हो चुका है एवं कुछ ग्राम में कार्य प्रगति पर है।
Published on:
12 Apr 2023 03:21 pm
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