
नगर निगम के रिकार्ड में बेशकीमती सरकारी जमीन है। विभागीय सहयोग से इस जमीन का व्यवसायिक इस्तेमाल करने की कार्ययोजना बनें तो न केवल निगम की आय के नए स्त्रोत बनेंगे बल्कि सरकारी अनुदान पर निर्भरता भी कम हो सकेगी। दरअसल इस दिशा में कोई काम ही नहीं हो पा रहा है और ना ही ऐसा कोई प्लान बनाने कोई तैयार हैं।
देखा जाए तो नगर निगम के राजस्व और गैर राजस्व श्रेणी के टैक्स, दुकान किराया, बाजार शुल्क एवं अन्य मद की आय करीब 36 करोड़ रुपए सालाना हैं। इसकी तुलना में निगम कर्मचारियों की तनख्वाह हर माह 3.50 करोड़ रुपए के हिसाब से सालाना 42 करोड़ रुपए हैं। पहले चुंगी क्षतिपूर्ति अनुदान 1.50 करोड़ रुपए मिलता था, तब तनख्वाह के बजट की समस्या नहीं आती थी। अब निगम को अपने राजस्व का अधिकांश भाग केवल वेतन पर खर्च करना पड़ रहा है। शेष बजट मुश्किल से सडक़, नाली, पुल-पुलिया समेत अन्य निर्माण पर खर्च हो रहा है। दो साल पहले 2023 में निगम के दो स्त्रोत अस्थायी बाजार शुल्क तथा पशु बाजार शुल्क बंद होने से निगम को दो करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
इससे निगम का राजस्व व्यवस्था भी बिगड़ गई है। निगम अधिकारी-कर्मचारी खुद मान रहे हैं कि सरकारी अनुदान कम होने तथा स्थानीय टैक्स संसाधन सीमित होने से निगम मेें आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया की स्थिति बनी है। इस समस्या से निजात पाने आय के दूसरे स्त्रोत भी तैयार करने होंगे।
Published on:
09 Jun 2025 11:17 am
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