
जिला अस्पताल की पैथालॉजी लैब में किसी प्रकार की जांच कराना हो तो सबसे पहले आपको आभा आईडी बनाना होगा। इसके बाद ही संबंधित जांच हो सकेगी। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले में 16.10 लाख आभा आईडी बनाई जा चुकी है। यह प्रदेश के रिकार्ड में 77 प्रतिशत है।
विभागीय जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की आभा आईडी में हर व्यक्ति की पुरानी बीमारियों का रिकार्ड दर्ज हो जाता है। इसके अलावा जितनी भी लेबोरेटरी जांच होती है,उन्हें भी दर्ज किया जा रहा है। इससे कभी भी किसी डॉक्टर को बीमारी या जांच का रिकार्ड हासिल करना हो तो वह हासिल कर सकता है। ऐसे में पैथालॉजी जांच में आभा आईडी की अनिवार्यता लागू हो गई है।
पैथालॉजी लैब के कर्मचारियों के अनुसार पिछले एक माह से पैथालॉजी लैब में आनेवाले मरीजों के साथ आभा आईडी की व्यवस्था लागू कर दी गई है। कर्मचारी पहले मरीजों से आभा आईडी पूछते है। जैसे ही आभा आईडी प्रस्तुत करते है, उनके नंबर के आधार पर लैब की जांच के रिकार्ड को दर्ज किया जाता है।
सिविल सर्जन डॉ.नरेश गुन्नाड़े का कहना है कि पैथालॉजी लैब में आभा आईडी को अनिवार्य किया गया है। इसमें लैब की जांच रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। यह आधार आईडी से तुरंत जनरेट हो जाती है। फिलहाल 20.90 लाख आभा आइडी के लक्ष्य पर स्वास्थ्य विभाग ने 16.10 लाख आभा आइडी जनरेट कर दी है। इससे जिला मप्र के टॉप जिलों में शामिल है।
Published on:
21 Aug 2025 10:57 am
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