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Janmashtami: 30 साल बाद अद्भुत संयोग, सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी जन्माष्टमी

देवकीनंदन के जन्मोत्सव की हो रही विशेष तैयारी

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यहां एक किलोमीटर बाहर आकर महिलाएं करती है चांद की पूजा

तीज पर अजमेर के नगर में चांद की पूजा करती महिलाए।

छिंदवाड़ा. भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व 6 सितंबर को सर्वार्थ सिद्धि योग और जयंती योग में मनाई जाएगी। छह सितंबर को जन्माष्टमी पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। पंडित दिनेश शर्मा ने बताया कि जब भगवान कृष्ण का धरती पर अवतरण हुआ था, उस समय भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष, अष्टमी तिथि, दिन बुधवार, रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृष राशि में स्थित थे। इस वर्ष भी बिल्कुल वही योग बन रहे हैं। छह सितंबर को दोपहर 03.37 बजे से अष्टमी तिथि आ जाएगी। सुबह 9.19 बजे के बाद रोहिणी नक्षत्र जाएगा और रात 10.57 बजे से 12 बजे के बाद तक वृषभ राशि में उच्च के चंद्रमा रहेंगे। इसलिए छह सितंबर को ही व्रत रखना अभीष्ट फलदायक होगा। छह सितंबर को गृहस्थ जन्माष्टमी मनाएंगे। जन्माष्टमी पर पूरे दिन बनने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला होगा। सात सितंबर को वैष्णव पंथ के अनुयायी जो साधु संत हैं वह जन्माष्टमी मनाएंगे।


30 साल बाद विशेष मुहूर्त
उल्लेखनीय है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बुधवार को रोहिणी नक्षत्र में अद्र्धरात्रि 12 बजे वृष राशि स्थित चंद्र में हुआ था। इस बार जन्माष्टमी पर 30 साल बाद ऐसा ही विशेष मुहूर्त होने से लोग खुश हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, चन्द्रमा वृष राशि में और रोहिणी नक्षत्र बनने के साथ ही शनि देव 30 साल बाद अपनी स्वराशि कुंभ में संचरण कर रहे हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. दिनेश के अनुसार यह अद्भुत संयोग है, लेकिन कुंडली में ग्रहों की स्थिति कृष्ण जन्म के समान नहीं है। फिर भी इस दिन जन्म लेने वाले बच्चे बुद्धिमान और ज्ञानी होंगे तथा आर्थिक मामलों में संपन्न एवं कूटनीतिज्ञ होंगे।

जन्माष्टमी पर दो मत
सनातन धर्म में शैव तथा वैष्णव मत का प्रचलन है। जिस कारण जन्माष्टमी को लेकर हमेशा से दो मत रहे हैं। इस बार भी शैव मत की जन्माष्टमी छह सितंबर को और वैष्णव मत के अनुसार सात सितंबर को मनेगी। छह को सर्वार्थ सिद्धि योग में विशिष्ट पूजन विशेष फलदायी होगा। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। इस बार छह सितंबर बुधवार को रोहिणी नक्षत्र में श्री कृष्ण का जन्मोत्सव वृषभ राशि के चंद्रमा की साक्षी में मनाया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी रोहिणी युक्त मध्य रात्रि में विशेष मानी जाती है।


पूजा का शुभ मुहूर्त
भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का शुभ मुहूर्त 6 सितंबर की मध्य रात्रि 12.02 बजे से मध्य रात्रि 12.48 बजे तक रहेगा। जन्माष्टमी के लिए शहर के विभिन्न मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं।