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Kisan rail: किसान रेल अन्नदाता से ज्यादा व्यापारियों के लिए बनी फायदेमंद

किसान रेल छिंदवाड़ा से पश्चिम बंगाल(संकरेल) तक चलाने का निर्णय लिया है।

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Kisan rail: किसान रेल अन्नदाता से ज्यादा व्यापारियों के लिए बनी फायदेमंद

Kisan rail: किसान रेल अन्नदाता से ज्यादा व्यापारियों के लिए बनी फायदेमंद

छिंदवाड़ा. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, नागपुर मंडल ने व्यापारियों की डिमांड पर किसान रेल छिंदवाड़ा से पश्चिम बंगाल(संकरेल) तक चलाने का निर्णय लिया है। बड़ी बात यह है कि रेलवे ने किसान रेल की रैक सोमवार सुबह 11 बजे इतवारी से छिंदवाड़ा भी भेज दी और इसमें देर शाम तक चार व्यापारियों द्वारा बुक की गई 220 टन आलू भी लोड हो गया है। किसान रेल मंगलवार सुबह आलू लेकर निर्धारित समय सुबह 5.40 बजे पश्चिम बंगाल के लिए रवाना होगी। यह किसान रेल इतवारी, गोंदिया, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, झारसुगुड़ा, राउलकेला, टाटा, खडग़पुर होते हुए अगले दिन सुबह 8.55 बजे संकरेल पहुंचेगी। बता दें कि किसानों को उनके उत्पादों की अच्छी कीमत दिलाने के उद्देश्य से रेलवे द्वारा किसान रेल का परिचालन किया जा रहा है। किसान रेल में कृषि और बागवानी उत्पादों को बुक करने पर किसानों को किराए में 50 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है।

उठता है सवाल
रेलवे का कहना है कि किसान रेल का परिचालन किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन हकीकत इससे अलग दिख रही है। बीते तीन बार से तो यही सामने आया है। रेलवे ने बिना प्रचार-प्रसार एवं किसानों से सुझाव लिए ही 20 एवं 26 दिसंबर को किसान रेल की रैक अचानक ही छिंदवाड़ा भेज दी। गनीमत रही कि दोनों बार व्यापारियों ने 200 टन से अधिक आलू बुक कर रेलवे को घाटा नहीं होने दिया। हालांकि तीसरी बार किसान रेल के प्रचार-प्रसार एवं किसानों से संपर्क न करने का नतीजा साफ दिखा। 27 दिसंबर को एक बार फिर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने वही गलती की। प्रचार-प्रसार एवं किसानों से चर्चा किए बगैर ही एक बार फिर किसान रेल के अचानक परिचालन का निर्णय लेते हुए किसान रेल देर शाम छिंदवाड़ा भेज दी। हैरानी की बात यह थी कि इस ट्रेन के परिचालन की जानकारी स्थानीय रेलवे अधिकारियों को तब तक नहीं हुई थी जब तक ट्रेन छिंदवाड़ा नहीं पहुंची। परिणाम यह हुआ कि ट्रेन में एक भी बुकिंग नहीं हुई। ऐसे में 30 दिसंबर को किसान रेल की खाली रैक इतवारी के लिए रवाना करनी पड़ी। सवाल यह उठता है कि अगर किसान रेल किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए चलाई जा रही है तो फिर रेलवे किसानों के बीच जाकर इस संबंध में उनसे चर्चा क्यों नहीं कर रही है, इसका प्रचार-प्रसार क्यों नहीं हो रहा है। किसान रेल किसानों के लिए कम व्यापारियों के लिए अधिक फायदाजनक दिख रही है।