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छह साल से किराए के भवन में स्टोर हो रही करोड़ों की जीवनरक्षक दवाएं

शासन द्वारा छिंदवाड़ा एवं पांढुर्ना जिले में 6 सिविल अस्पताल, 9 सीएससी सेंटर, 67 पीएचसी, 2 यूपीएससी, 388 सब सेंटर, 16 संजीवनी क्लिनिक खोली गई है। इन जगहों पर मरीजों का उपचार एवं निशुल्क दवाएं दी जाती हैं। दवाओं का भंडारण छिंदवाड़ा के शिवनगर कॉलोनी में किराए के भवन में स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। हर माह करोड़ों की दवा यहां आती है और हर स्वास्थ्य केन्द्र पर वितरण की जाती हैं।
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शासन की गाइडलाइन का भी नहीं हो रहा पालन

छिंदवाड़ा. जिले में मरीजों को समय पर जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए रखी जाने वाली दवाओं का भंडारण पिछले छह वर्षों से किराए के भवन में किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग आज तक दवा भंडारण के लिए स्थायी भवन की व्यवस्था नहीं कर पाया है, जिसके चलते पूरी व्यवस्था अस्थायी संसाधनों के सहारे संचालित हो रही है। जानकारी के अनुसार जिले के शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में आपूर्ति के लिए आने वाली जीवनरक्षक दवाओं को किराए के भवन में सुरक्षित रखा जाता है। यहां से आवश्यकता के अनुसार विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक दवाओं की आपूर्ति की जाती है। हालांकि विभाग का कहना है कि दवाओं के रखरखाव के लिए आवश्यक मानकों का पालन किया जा रहा है, लेकिन लंबे समय से किराए के भवन पर निर्भरता व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। जानकारों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण सेवा के लिए दवा भंडारण का अपना स्थायी भवन होना चाहिए, ताकि दवाओं के सुरक्षित रखरखाव के साथ वितरण व्यवस्था भी अधिक प्रभावी बन सके।

हर माह 70 हजार किराया, डेढ़ साल से नहीं भुगतान
वर्तमान में जिले के शासकीय स्वास्थ्य केन्द्रों पर वितरित की जाने वाली 511 प्रकार की जीवनरक्षक दवाओं को शिवनगर कॉलोनी में भंडारण किया जा रहा है। दरअसल वर्ष 2020 से पहले दवाओं का भंडारण टीवी सेनटोरियम के पास स्वास्थ्य विभाग की बिल्डिंग में किया जाता था। मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए पूरी बिल्डिंग तोड़ दी गई और शिवनगर कॉलोनी में दवाओं का भंडारण किया जाने लगा। बड़ी बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर माह इसके लिए 70 हजार रुपए किराया दिया जा रहा है। विभाग ने डेढ़ साल से किराया भी नहीं दिया है।

पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल
शिवनगर के जिस क्षेत्र में जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों पर वितरित की जाने वाली जीवनरक्षक दवाएं स्टोर की जा रही हैं वहां पहले कबाड़ रखा जाता था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस जगह पर जीवनरक्षक दवाएं रखने के लिए चुना। आसपास के क्षेत्र में भी अभी भी कई जगह कबाड़ी की दुकान है। जिस जगह दवा रखी जा रही हैं वहां भवन का एरिया लगभग 6000 क्वायर फीट है। जबकि जरूरत 15000 क्वायर फीट क्षेत्र की है। ऐसे में दवाओं को भी व्यवस्थित तरीके से नहीं रखा जा रहा है। इसके अलावा मच्छर से यहां स्टॉफ भी काफी परेशान है। भवन में सुरक्षा के मानकों का भी पालन नहीं हो रहा है।

शासन की गाइडलाइन की उड़ रही धज्जियां
शासन की गाइडलाइन के अनुसार जीवनरक्षक दवाओं को ऐसी जगह भंडारण किया जाना चाहिए जहां पर प्रर्याप्त हवा हो। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था, आग बुझाने के साधन सहित अन्य व्यवस्थाएं भी पुख्ता होना चाहिए। इसमें से अधिकतर का पालन नहीं हो रहा है।

दस स्टॉफ के लिए शौचालय की भी दरकार
दवा भंडारण को लेकर स्वास्थ्य विभाग के 10 कर्मचारियों की तैनाती की गई है। लेकिन मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। भवन में शौचालय की व्यवस्था न होने से स्टॉफ को आसपास जाना पड़ता है।