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Mathematics Day 2022: जब छात्रों से फीडबैक मिलने लगा तो लगा मैं सफल हो गया

अंतरराष्ट्रीय गणित दिवस पर विशेष

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Mathematics Day 2022: जब छात्रों से फीडबैक मिलने लगा तो लगा मैं सफल हो गया

Mathematics Day 2022: जब छात्रों से फीडबैक मिलने लगा तो लगा मैं सफल हो गया

छिंदवाड़ा. अपने जिले में गणित विषय के कई शिक्षक हैं, जो ईमानदारी और मेहनत से ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं। उन्हीं में से एक हैं शासकीय स्वशासी कॉलेज में पदस्थ वरिष्ठ प्राध्यापक 63 वर्षीय अमरचन्द लांबा। जिन्होंने गणित विषय को ही अपना जीवन बनाया। गणित के सहारे अपनी अलग पहचान बनाई। अमरचन्द लांबा(लांबा सर) के नाम से आज वे न केवल छिंदवाड़ा में बल्कि प्रदेश में भी जाने जाते हैं। उनके द्वारा पढ़ाए गए छात्र कोने-कोने में उनका नाम फैला रहे हैं। लांबा सर ने बताया कि बाल्यावस्था में उनकी अधिक रूचि पढ़ाई में नहीं थी। क्लास में सबसे पीछे बैठते थे। हालांकि गणित विषय उन्हें अच्छा लगता था। 9वीं क्लास में जब वे पहुंचे तो उन्होंने पढ़ाई को गंभीरता से लिया और गणित विषय को ही प्रमुख रूप से चुना और उसी में ही काफी मेहनत करने लगे। एक समय ऐसा भी आया जब लांबा सर जिस क्लास में पढ़ते थे उसी क्लास में अध्ययन करने वाले साथियों को भी गणित विषय पढ़ाते थे। दोस्त उनके द्वारा पढ़ाई गए गणित विषय की सराहना करते थे। तब लांबा सर ने यह निर्णय लिया कि वे शिक्षक बनेंगे। बीएससी एवं एमएससी की पढ़ाई के बाद वर्ष 1982 में वे गणित के प्राध्यापक बने। भोपाल के पास राजगढ़, नरसिंहगढ़ सहित अन्य जगहों पर पदास्थापना के बाद छिंदवाड़ा स्थानांतरण हुआ और यही पर ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं।

खुबी की वजह से बनी अलग पहचान
अमरचन्द लांबा ने बताया कि मैं छात्रों का चेहरा पढ़ लेता हूं। उनका स्तर जानता हूं। नीचे के स्तर से ऊपर तक जाता हूं। टॉपर के साथ नहीं बल्कि जो कमजोर है उसके साथ मेहनत करता हूं। जब तक छात्र समझ नहीं लेता तब तक उसे बताता हूं। लांबा सर ने बताया कि कुछ समय तक पीजी कॉलेज में शाम 4 से 5 बजे तक प्रतियोगी परीक्षा के लिए गणित की अलग से क्लास भी लगाई। इन सब वजहों से छात्र उन्हें पसंद करने लगे। उन्होंने बताया कि जब मेरे द्वारा पढ़ाए गए बच्चे सफल होने लगे और मेरा नाम लेने लगे तब मुझे लगा कि मैं सफल हो गया।