
छिंदवाड़ा के पांढुर्ना में एक बार फिर दो गांवों के बीच 'युद्ध' हुआ। दोनों गांवों के लोगों ने एक दूसरे पर पत्थरों की बरसात की जिसमें 400 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। हम बात कर रहे हैं पांढुर्ना में हुए ऐतिहासिक गोटमार मेले की जिसमें झंडे को हासिल करने की लड़ाई में एक बार फिर जमकर प्रशासन की मौजूदगी में जमकर खून बहा है। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां से कुछ को मरहम पट्टी कर छुट्टी दे दी गई है तो वहीं कुछ को गंभीर चोट होने के कारण भर्ती किया गया है।
गोटमार मेले में फिर बरसे पत्थर
पोला पर्व के दूसरे दिन छिंदवाड़ा के पांढुर्ना में हर साल की इस साल भी ऐतिहासिक गोटमार मेले का आयोजन हुआ। बारिश के बीच पांढुर्ना और सावरगांव के बीच से बहने वाली जाम नदी के तेज बहाव के बीच पलाश के पेड़ को लगाकर उस पर झंडा लगाया गया और देवी चंडिका के मंदिर में पूजा अर्चना के बाद पत्थरबाजी की शुरुआत हुई। बारिश के बीच नदी से झंडा निकालने की कोशिश की गई। दोनों गांव के बीच हुई पत्थरबाजी में 4 सैकड़ा से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। मेले के द्वारा प्रशासनिक अधिकारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा।
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किवदंती- प्रेमी युगल की मौत से शुरु हुई परंपरा
गोटमार मेले के पीछे एक किवदंती है गांव के लोग बताते हैं कि कई साल पहले पांढुर्ना के एक युवक और सावरगांव की एक युवती के बीच प्यार हो गया। युवक सावरगांव पहुंचा और युवती को भगाकर पांढुर्ना लाने लगा लेकिन जैसे ही प्रेमी युगल दोनों गांवों के बीच से बहने वाली जाम नदी के बीच में पहुंचे तो सावरगांव के लोग आ गए और उन्होंने दोनों पर पत्थर बरसाने शुरु कर दिए। पांढुर्ना के लोग भी इकहट्ठे हुए और उन्होंने भी पत्थर बरसाए और इसी पत्थरबाजी में प्रेमी युगल की मौत हो गई। तब से हर साल ये गोटमार मेला परंपरा निभाई जाने लगी। परंपरा के अनुसार जाम नदी के बीचो-बीच झंडेरूपी पलाश के पेड़ को गाड़ा जाता है और दोनों गांवों के लेकर एक दूसरे पर पत्थर बरसाते हैं और नदी के बीच लगे पेड़ से झंडा हासिल करने की कोशिश करते हैं जिस गांव के लोग झंडा हासिल कर लेते हैं वो विजयी घोषित होता है।
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Updated on:
15 Sept 2023 10:08 pm
Published on:
15 Sept 2023 10:01 pm
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