
mp election 2018 : यहां 30 वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे मतदाता, देखें वीडियो
छिंदवाड़ा. शहर में क्षेत्र के हिसाब से लोगों की समस्याएं और प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिल रहा है। रविवार को ‘पत्रिका’ टीम छिंदवाड़ा विधानसभा के वार्ड नम्बर-40 पहुंची। यह क्षेत्र तात्या टोपे वार्ड के भी नाम से जाना जाता है। इस वार्ड में नोनिया करबल के मतदाताओं से बातचीत की तो समस्याएं सामने आईं। मतदाताओं का कहना था कि पहले यह क्षेत्र ग्राम पंचायत में आता था। मूलभूत सुविधाओं के लिए हम लोग करीब 30 वर्ष से तरस रहे हैं। तीन वर्ष पहले जब क्षेत्र नगर पालिका निगम में शामिल हुआ तो उम्मीद जगी कि शहर की तरह अब हमारा क्षेत्र भी विकास करेगा, लेकिन आज भी स्थिति जस की तस है। सरकार बदली, लेकिन क्षेत्र के हालात नहीं। कच्ची सडक़ पर छोटे-बड़े रोड़े आए दिन हादसे को बुलावा दे रहे हैं। बारिश में हालात इस कदर खराब हो जाते हैं कि शाम ढलने के बाद कोई घर से नहीं निकलता। बिजली भी अभी सभी घरों तक नहीं पहुंच पाई है। पानी की समस्या से क्षेत्र के लोग जूझ रहे हैं। जहां जिसका मन करता है वह वहीं गंदगी फैला देता है। स्वच्छता टीम भी उनके दर पर कभी कूड़ा लेने नहीं पहुंचती। दिखावे के लिए कभी कभार गाडिय़ां आस-पास घूमा करती हैं। क्षेत्रवासियों के लिए यह समस्याएं ही प्रमुख मुद्दा हैं।
नपानि वसूलता है टैक्स
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सुविधाओं के नाम पर नगर पालिका निगम उनसे टैक्स वसूलती है, लेकिन सुविधाएं नहीं देती। जनप्रतिनिधियों से बात करो तो वे कोई न कोई बहाना बनाते हैं।
परासिया रोड से सब्जी मंडी निकलती है कच्ची सडक़
क्षेत्रवासियों का कहना है कि परासिया रोड से मुख्य मार्ग संचार कॉलोनी सब्जी मंडी के समीप की ओर निकलती है। करीब ३० वर्षों से कच्ची सडक़ से ही प्रतिदिन हजारों लोग आवागमन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों ने सडक़ को पक्की करने की सुध नहीं ली। हालांकि परासिया रोड से इस मार्ग पर कुछ दूरी तक पक्की सडक़ का निर्माण कुछ माह पहले किया गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सडक़ राजनीतिक समीकरण में फंसी पड़ी है। एक दल दूसरे दल पर ठीकरा फोड़ता रहता है। ऐसे में हम सुविधाओं से महरूम रह जाते हैं।
क्या कहते हैं रहवासी
स्थानीय निवासी बब्बन राव घोरसे का कहना है कि समस्याएं करीब 30 वर्ष से चली आ रही हैं। आज तक हम लोगों को मूलभूत सुविधा नहीं मिल पाई। पंचायत में भी स्थिति यही थी और अब नगर पालिक निगम से भी उम्मीद खत्म हो चली है। सुशीला का कहना है कि बारिश में सडक़ दलदल में तब्दील हो जाती है। बच्चों को घर से बाहर भेजने में डर लगता है। चुनाव जब आता है तो नेता वादे करते हैं, आश्वासन देकर चले जाते हैं फिर जीतने के बाद भूल जाते हैं। मुन्नीबाई का कहना है कि निगम को टैक्स हम देते हैं, लेकिन सुविधा नहीं मिलती। जनप्रतिनिधि भी ध्यान नहीं देते। चुनाव में वादे किए जाते हैं और जीतने के बाद सब भूल जाते हैं। हमलोग केवल आश्वासन से ही काम चला रहे हैं। रामप्रसाद पवार का कहना है कि यहां न रोड है न बिजली और न ही पानी की सुविधा। आखिर हमारा क्षेत्र किस बात के लिए नगर पालिका निगम में शामिल हुआ। जनप्रतिनिधि से कुछ कहो तो महज आश्वासन देते हैं। ऐसा कब तक चलेगा।
Published on:
26 Nov 2018 12:08 pm
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